मेरे प्रिय दीक्षा, आश्रय प्राप्त, आकांक्षी, शिक्षा शिष्यों, प्रशिष्यों, एवम् शुभचिंतकगण
कृपया मेरा आशीर्वाद व शुभकामनाएँ स्वीकार करें।
श्रील प्रभुपाद की जय हो!
मेरे निवास स्थान से लिखित: श्री मायापुर चंद्रोदय मंदिर, श्रीधाम मायापुर।
मलेशिया से आने के उपरांत , मैं कुछ दिनों के लिए कोलकाता में रहा वहाँ मोतियाबिंद की शल्य-चिकित्सा करवाने का निर्णय किया। मेरे स्वास्थ्य संघ ने विभिन्न विकल्पों की खोज करके पाया कि रानाघाट में उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएँ हैं। अत:, श्रीधाम मायापुर जाते समय, मैंने रानाघाट के नेत्रज्योति चिकित्सालय में शल्य-चिकित्सा करवाई एवं उसी दिन श्रीधाम मायापुर पुन: आ सका। मोतियाबिंद की शल्य-चिकित्सा के उपरांत मेरे दाहिने नेत्र की दृष्टि में सुधार हुआ है। अब, मेरे शिष्य व नेत्र रोग विशेषज्ञ, डॉ. वनमाली ने मुझे सूचित किया है कि मुझे शीघ्र ही अपने बांये नेत्र के मोतियाबिंद की भी शल्य-चिकित्सा करवानी होगी।
मैं श्रील प्रभुपाद द्वारा दिए गए विभिन्न निर्देशों पर विचार कर रहा हूँ। उनमें से एक है कृष्ण भावनामृत को विश्व भर में असीमित रूप से विस्तारित करना । प्रत्येक शिष्य को यह विचार करना चाहिए कि वे इस कृष्ण भावनामृत को कैसे विस्तारित कर सकते हैं, यहाँ तक कि एक दिन में या प्रत्येक माह या प्रत्येक वर्ष एक या अधिक लोगों तक, इस प्रकार आप सभी श्री चैतन्य महाप्रभु के संदेश का प्रसार करने में लगे रहेंगे। कृपया इसे असीमित रूप से करने में मेरी सहायता करें। तथापि, इस कार्य के लिए मात्र एक सचिव नहीं होना चाहिए; अपितु मेरा मानना है कि असीमित सचिव होने चाहिए। सभी को, विशेष रूप से मेरे शिष्यों को, यह भूमिका निभानी चाहिए, इसके अतिरिक्त कोई भी इच्छुक व्यक्ति इसमें सम्मिलित हो सकता है। यह एक असीमित आदेश है, तो इसे पूर्ण करने के लिए मुझे असीमित सचिवों की आवश्यकता है। यदि आपके पास कोई सुझाव है, तो आप जयपताका स्वामी ऐप पर मेरे साथ कुछ सुझाव साझा कर सकते हैं, होम स्क्रीन से निर्देश प्रोजेक्ट बटन पर क्लिक करके कृष्ण भावनामृत को असीमित रूप से विस्तारित करने का चयन करके। यह जयपताका स्वामी ऐप Android और Apple iPhone दोनों के लिए उपलब्ध है। आप नीचे दिए गए लिंक से जयपताका स्वामी ऐप डाउनलोड कर सकते हैं:
एंड्रॉयड:
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.jayapatakaswami.jpsapp
आईफोन:
https://apps.apple.com/in/app/jayapataka-swami/id967072815
श्रीधाम मायापुर में, मैं प्रतिदिन श्री विग्रहों के दर्शन के लिए जाता हूँ, जब वहाँ अधिक भीड़ नहीं होती है, जैसा कि मेरे चिकित्सकों ने परामर्श दिया है। मैं प्रतिरक्षा दमनकारी औषधियाँ ले रहा हूँ, जिससे मैं विशेष रूप से रोगों के प्रति संवेदनशील हूँ। प्रत्येक रात्रि मैं या तो पद्म भवन रूफटॉप पर या नाम-हट्टा में एक कक्षा देता हूँ। सोने से पूर्व मैं प्रतिदिन श्री चैतन्य चरितामृत का पाठ करता हूँ। सप्ताह में तीन दिन मैं डायलिसिस करवाता हूँ, जिसमें सामान्यतः चार से साढ़े चार घंटे लगते हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आपके क्षेत्र के चिकित्सालों में हीमोडायफिल्ट्रेशन डायलिसिस की सुविधा है। कृपया मेरे निजी चिकित्सक, डॉ. हरिगुरु गौर दास को harshbuttrue142@gmail.com पर लिखें। अपनी ऑनलाइन व ऑफलाइन बैठकों के अतिरिक्त , मैं विभिन्न भक्तों के अपडेट, रिपोर्ट तथा चिंताएँ सुनने के लिए उनसे भी संबद्ध होता हूँ।
इस माह के संदेश में, मैं अपने प्रातः काल के कार्यक्रम के विषय में जानकारी साझा करना चाहूँगा। प्रत्येक प्रातःकाल, मैं श्रील प्रभुपाद की समाधि आरती में सम्मिलित होता हूँ, उसके उपरांत श्री श्री पंच-तत्व, श्री श्री राधा माधव अष्ट-सखियाँ, श्री श्री राधा माधव मायापुर चंद्र,श्री प्रह्लाद-नृसिंह, श्री श्री जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा मैया ,श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु, नित्यानंद प्रभु, अद्वैत आचार्य, गौर निताई एवम् अंत में पुरुषों व महिलाओं दोनों के लिए तुलसी आरती का दर्शन करता हूँ। मैं आगंतुकों, प्रसाद वितरण, पुस्तक वितरण व अन्य विषयों के अपडेट भी प्राप्त करता हूँ।
इसके उपरांत , मैं फिजियोथेरेपी करता हूँ, कभी-कभी एक, दो, तीन या चार लोगों की सहायता से। आज, मेरे पास चार सहायक थे जिन्होंने मुझे हाथ के भिन्न भिन्न व्यायाम सिखाए। इस बीच, किसी ने मुझे मुख की मालिश दी, इसे 20 बार दोहराया। चरणों के भी अनेक व्यायाम हैं। उदाहरण के लिए, वे मेरे चरणों पर एक गोल तकिया रखते हैं, तो मैं इसे 10 बार उठाता हूँ। उसके उपरांत वे तकिये को मेरे चरणों के मध्य रखते हैं, तब मैं इसे 10 बार दबाता हूँ। मैं फिजियोथेरेपिस्ट को दूर धकेलने के लिए बाहर की ओर भी दबाता हूँ। दोहराव की संख्या सत्र के आधार पर भिन्न होती है। अपने हाथों एवम् कंधों के लिए,ऊपर व नीचे होते हुए, मैं अपने सिर के ऊपर 10 बार वजन उठाता हूँ । बैठते समय, मैं बाईं ओर मुड़ता हूँ, तब वे ताल-मेल करते हैं। जब भी संभव हो, मैं अपने दाहिने हाथ को शक्ति प्रदान करने के लिए एक नरम रबर की गेंद को दबाता हूँ, जिसमें एक ए.वी.फिस्टुला स्थायी रूप से लगा हुआ है, इस गेंद को दबाने का लक्ष्य दिन में कम से कम 500 बार है। इन अभ्यासों के उपरांत, मैं पाँच मिनट का विश्राम करता हूँ। मैं छाती की थेरेपी भी करता हूँ, तत्पश्चात् 20 पग चलता हूँ तदुपरांत अपने कूल्हों व पेट के लिए व्यायाम करता हूँ। जब ये सभी थेरेपी चल रही होती हैं, तो मैं नामजप करता रहता हूँ। मेरे सचिवों ने मुझे बताया कि इस माह मैंने कुल 846 माला का जप किया। कभी-कभी, जब मैं मध्य रात्रि को जाग जाता हूंँ फिर सो नहीं पाता हूंँ, तो मैं अपने हाथों का उपयोग करके जप करता हूंँ।
मैं अपने स्वर नली (वोकल कॉर्ड) वाइब्रेशन को उत्तम बनाने के लिए गहरी सांस लेते हुए विभिन्न ध्वनियाँ निकालते हुए ध्वनि निर्माण अभ्यास भी करता हूँ। इससे मुझे बिना थके लंबी कक्षाएँ देने में सहायता प्राप्त होती है एवं मेरे स्वर की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, मैं प्रसादम लेते समय श्वसन मार्ग में अवरोध को कम करने के लिए निगलने के व्यायाम भी करता हूँ। इसके लिए, वे मुझे मेरी जिह्वा की नोक को अपने दांतों के मध्य रखने व निगलने का प्रयास करने के लिए कहते हैं। स्पीच थेरेपी का उद्देश्य मेरी वाणी को स्पष्ट बनाना है।
मैं निरंतर आपके आध्यात्मिक कल्याण के लिए श्री श्री राधा माधव अष्ट-सखियों तथा श्री प्रह्लाद-नृसिंह के चरणों में प्रार्थना करता हूँ इस शरीर की देखभाल करना मेरे लिए महत्वपूर्ण है। मैं बहुधा 1970 में श्रील प्रभुपाद को मेरे द्वारा दी गई व्यास-पूजा गुणानुवर्णन पर मनन करता हूं, जहाँ मैंने घोषणा की थी कि मेरा जीवन मेरा अपना नहीं है अपितु उनका है। उन्होंने मुझे जो सौंपा है, मैं उसकी देखभाल करने व उनके निर्देशों को पूर्ण करने का प्रयास करता हूंँ; मैं श्रील प्रभुपाद की संपत्ति की देखभाल करने, उन्हें प्रसन्न करने के उपायों से इसका उपयोग करने व उन्होंने मुझे जो भी निर्देश दिए हैं, उन्हें पूर्ण करने का संपूर्ण प्रयास कर रहा हूँ ।
मुझे भक्तों से जन्माष्टमी समारोह एवम् भद्र पूर्णिमा के विषय में विभिन्न रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं। पाकिस्तान में जन्माष्टमी समारोह पर एक रोचक रिपोर्ट थी। मैं श्री श्रीमद् गोपाल कृष्ण गोस्वामी के शिष्यों से उनके लिए बनाए गए एक विशेष ईमेल आईडी पर ईमेल, अपडेट व रिपोर्ट भी प्राप्त करता हूँ। मुझे अपने शिष्य भद्र रूप दास से श्रील प्रभुपाद की जिनेवा यात्रा की 50वीं वर्षगांठ के उत्सव पर एक रिपोर्ट प्राप्त करके भी प्रसन्नता हुई।
https://iskconnews.org/50th-anniversary-of-srila-prabhupadas-visit-to-geneva-celebrated-at-un-hq/
इस माह , हमने विश्व के अनेक भागों से श्रीधाम मायापुर में भक्तों का स्वागत किया। हाल ही में, एक ही दिन में 50,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने श्रीधाम मायापुर का भ्रमण किया। नाम-हट्ट विभाग ने विभिन्न नाम-हट्टों के लिए विभिन्न सम्मेलन आयोजित किए, मैंने मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम तथा दक्षिण एवम् पश्चिम ओडिशा के भक्तों को संबोधित किया। कुछ क्षेत्रों में, उन्होंने 10% गांवों में नाम-हट्टों की स्थापना की है, किंतु हमारा लक्ष्य सभी को भगवान् चैतन्य की कृपा प्राप्त कराना है। नेपाल से पत्री दास भी आये, जो श्रीधाम मायापुर में 700 से अधिक भक्तों को लेकर आए थे। मैंने सुझाव दिया कि भविष्य में, हमें नेपाली भक्तों के लिए एक भिन्न नवद्वीप-मंडल परिक्रमा दल का आयोजन करना चाहिए। श्री श्रीमद् कविचंद्र स्वामी जापान से भक्तों का एक समूह लेकर आए, तो दूसरा समूह चेकोस्लोवाकिया एवं स्लोवाकिया से आया। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर ने उल्लेख किया कि नवद्वीप मंडल परिक्रमा में भारतीय भक्त अंतर्राष्ट्रीय भक्तों से मिलते, एक-दूसरे को आलिंगन करते हुए जय सचिनंदन का जप करते थे। उस समय, हमारे दो समूह थे- भारतीय दल व अंतर्राष्ट्रीय दल। पुरुष, पुरुषों का आलिंगन करते हुए "जय सचिनंदन!" कहते थे व महिलाएं, महिलाओं को आलिंगन करते हुए वही कहती थीं। हरिबोल! गौऊऊउरंगा! नित्यानंद!
पश्चिमी भक्त सराहना करते हैं ,जब श्रीधाम मायापुर में स्थानीय भक्त उनकी देखभाल करते हैं , मायापुर धाम की उनकी यात्रा के लिए आभार व्यक्त करते हैं। अब, बंगाल व अन्य राज्यों से स्थानीय भक्त मायापुर धाम आते हैं तो आप उन्हें मायापुर ऐप के विषय में सूचित कर सकते हैं एवं उनका स्वागत कर सकते हैं। यहाँ तक कि मायापुर ऐप के द्वारा, आप अपने घर से एक आभासी परिक्रमा भी कर सकते हैं! तो, चाहे आप अमेरिका, जापान, चीन, रूस, या कहीं अन्य स्थान पर हों - हुगली, बीरभूम, मेदिनीपुर, असम - आप इस ऐप के माध्यम से प्रतिदिन श्री विग्रहों के दर्शन कर सकते हैं। आप नीचे दिये इस लिंक से मायापुर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं:
https://mayapur.page.link/mayapurappdownload
*मैंने कुछ स्थानों पर ऐसे उदाहरणों के विषय में सुना है जहाँ भक्तों ने अन्य भक्तों की निंदा करके वैष्णव अपराध किए हैं। जबकि गलतफहमी, असफलताएँ या कठिनाइयाँ हो सकती हैं, हमें वैष्णवों के विरुद्ध सभी अपराधों से बचने के लिए अत्यंत सावधान रहना चाहिए। भगवान् कृष्ण अपने विरुद्ध किए गए अपराधों को सहन कर सकते हैं एवं उन्हें क्षमा कर सकते हैं, किंतु वे वैष्णवों के विरुद्ध किए गए अपराधों को क्षमा नहीं कर सकते। हमें यह सुनिश्चित करते हुए वैष्णवों से प्रेम करना, उनका सम्मान करना तथा उन पर विश्वास करना सीखना चाहिए, कि हम उन्हें किसी भी तरह से अपमानित न करें*।
आज, पूर्णिमा पर, मैंने आज प्रातः काल की मंगला आरती के समय श्री विग्रहों को परमानंद में नृत्य करते हुए देखा। *आज से, हम भगवान् दामोदर को घी के दीपक अर्पित करना आरंभ करेंगे। दामोदर माह में , सभी क्रियाकलापों को भक्ति सेवा के रूप में करने की अनुशंसा की जाती है। अंतिम पाँच दिवस भीष्म पंचक होंगे*। आप दामोदर माह के विषय में तथा दामोदर आउटरीच कार्यक्रमों का संचालन करने के प्रकारों के विषय में हमारे मण्डली विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं:
https://iskconcongregation.com/programs/damodar-outreach-program/
मुझे आशा है कि *सभी लोग इस माह को गंभीरता से लेकर दूसरों को भक्ति सेवा में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। यह प्रचार करने का एक महान अवसर है, तो यदि आप कृष्ण भावनामृत में प्रगति करना चाहते हैं, तो आपको इसे दूसरों के साथ साझा करना चाहिए, उन्हें पवित्र नाम का जप करने व श्री कृष्ण के निकट आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए*। भौतिक जगत में असीमित लाखों ब्रह्मांड हैं, व भौतिक जगत भगवान् की कुल ऊर्जा का एक-चौथाई है। आध्यात्मिक जगत भगवान् की ऊर्जा के तीन-चौथाई भाग से बना है इसे मापना हमारी क्षमता से कहीं परे है। *सब कुछ श्री कृष्ण के शरीर में विद्यमान है, जो इतने अद्भुत हैं कि वे प्रत्येक व्यक्ति के साथ एक व्यक्तिगत संबंध चाहते हैं। अत: , भगवान् कृष्ण को प्रसन्न करना व उनकी सेवा करना मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है*। जब हम पहचानते हैं कि श्री कृष्ण कितने विराट व महान हैं, तो हमें उनकी सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। *कृष्ण भावनामृत का अर्थ है सदैव श्री कृष्ण के विषय में जागरूक रहना व उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करना*।
सदैव आपका शुभचिंतक,
जयपताका स्वामी
जे.पी.एस./एसएसडीबी
Lecture Suggetions
-
20211016 दामोदर महोत्सव वैश्विक उद्घाटन
-
20210605 श्रीमद्-भागवतम् 1.8.52
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मायापुर को उद्बोधन
-
20210830 श्रीमद्-भागवतम्
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन तिरुपति को उद्बोधन
-
20211121 रशियन दूसरी पीढ़ी के शिष्यों को संबोधन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभवदिवस पर इस्कॉन गंगटोक और अंबाला भक्तों को संबोधन
-
20210711 गोलोक - भद्रा पूर्णिमा-श्रीमद-भगवतम अभियान संबोधन
-
20211003 प्रश्न और उत्तर, परम पूज्य जयपताका स्वामी के साथ
-
20210525 श्रीमद् भागवतम् 7.6.19
-
20211014 श्रील प्रभुपाद आ रहे हैं - सम्प्रदाय सम्मेलन को संबोधन
-
20210619 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.17
-
20211106 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.23
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मलेशिया और पर्थ को उद्बोधन
-
20210717 जीबीसी एसपीटी (रणनीतिक योजना टीम) के साथ साक्षात्कार
-
20210731 श्रीमद्-भागवतम् १.१०.४
-
20210828 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.33-35
-
20211017 इस्कॉन चेन्नई के पासाना उत्सव को संबोधित करते हुए
-
20210801 संबोधन: इस्कॉन जापान भक्ति-शास्त्री प्रमाण पत्र पुरस्कार समारोह
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव - इस्कॉन पूर्व और पश्चिम बंगाल को उद्बोधन
-
20210807 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.11-12
-
20211030 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.18
-
20211017 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.2
-
20211016 बांग्लादेश भक्तों के लिए संदेश
-
20210702 श्री गौर मंडल भूमि परियोजना संभाषण
-
20210801 भाद्र पूर्णिमा विशेष अभियान संबोधन
-
20210628 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20211122 श्रील प्रभुपाद पुस्तक वितरण मेराथोन उद्घाटन भाषण
-
20210701 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20210612 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.10
