
मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारिणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ॐ तत् सत्॥
जयपताका स्वामी: दामोदर-व्रत की शुरुआत की घोषणा करते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। विशेष रूप से इस महीने के दौरान सम्पन्न किया जाने वाला भगवान दामोदर और यशोदा को दीप दिखाने (दीप दान) का बाह्य लोक संपर्क (आउट रिच) कार्यक्रम। हमने देखा है कि यह सम्पूर्ण विश्व में एक अत्यंत जीवंत कार्यक्रम बन गया है और बाहरी जनसमुदाय ने भी यशोदा- दामोदर को दीप अर्पित करने की प्रक्रिया को अपनाया है और इस प्रकार सभी अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत एक मजबूत आधार के साथ कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का नेतृत्व मलेशिया के भक्तों द्वारा किया गया है और इसमें सैकड़ों- हजारों प्रतिभागी हैं। पिछले वर्ष , मुझे लगता है कि दिवाली के दिन उन्होंने एक राष्ट्रीय प्रतिमान स्थापित किया था। किंतु इससे पृथक , विश्व भर में अनेक जनसमुदाय दामोदर-पूजा कर रहे हैं। यह एक अत्यंत ही सरल कार्यक्रम है, भगवान और उनकी माता को दीप अर्पित करना। लोगों के द्वारा यह कार्यक्रम अत्यधिक पसंद किया जाता है, इसे करना अत्यंत ही सरल है और ऐसा करने से उन्हें न केवल अपने लिए, अपितु अपने पूर्वजों के लिए, अपने वंशजों के लिए भी विशेष लाभ प्राप्त हो रहा है और विभिन्न पुराणों में इसकी महिमा का वर्णन किया गया है। यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण सेवा है। मुझे अत्यधिक प्रसन्नता है कि भक्त अब दामोदर-पूजा की शुरुआत करेंगे। भक्त समूह विकास मंत्रालय ने एक ऐप तैयार किया है ताकि लोग अपने मोबाइल फोन पर अपनी प्रगति(दीपदान) रिकॉर्ड कर सकें। अधिकांश लोगों के पास स्मार्ट फोन हैं और इसे अभिलिखित (रिकार्ड) करना और संख्या भेजना आदि को अधिक सरल तरीके से बनाया जा रहा है। हमने देखा कि दक्षिण अमेरिका, कुएनका में भी, लोगों ने यशोदा दामोदर के चित्र पर छोटी मोमबत्तीयां अर्पित की। हो सकता है कि भगवान दामोदर के दर्शन से उन्हें, प्रभु यीशु और माता मरियम का स्मरण हुआ हो। जो कुछ भी है, हमने उन्हें बताया कि यह भगवान कृष्ण और माता यशोदा हैं और उन्होंने पंक्तिबद्ध होकर दीपक अर्पित किया। तो वे सभी अज्ञात सुकृति प्राप्त कर रहे हैं, वे जाने-अनजाने लाभान्वित हो रहे हैं और मैंने मलेशिया में सुना कि दिवाली सेल के दौरान कुछ स्टालों मे बिक्री को दामोदर-पूजा को समर्पित किया गया था। इस प्रकार विभिन्न समुदायों के लोग सामने आएंगे और इस दीपदान में भाग लेंगे। तो मैं केवल सभी को प्रोत्साहित करना चाहता हूँ। मुझे लगता है कि यह अति महत्वपूर्ण है और इस पद्धति से आप उपस्थित भक्त समूह के सदस्यों को प्रोत्साहित कर सकते हैं और आप नए भक्त सदस्य बना सकते हैं। तो, यह बाह्य लोक संपर्क कार्यक्रम (आउटरीच) , अत्यंत ही प्रभावी मार्ग है। भक्तों की संख्या मे वृद्धि और उनकी सक्रिय भागीदारी मे वर्धन, उन्हें आशीर्वाद और सौभाग्य प्रदान करना। महामारी के पश्चात के इस अंधकार में यह आशा की किरण है। मैं अधिक वार्तालाप नहीं करना चाहता। वास्तव में, इस समय मैं बांग्लादेश में अपने भाइयों और बहनों के लिए, हरे कृष्ण मंत्र की एक संक्षिप्त प्रार्थना करना चाहूँगा, जो हाल ही में विभिन्न हमलों और दंगों के शिकार हुए है। कुछ चिकित्सालय में हैं; एक ने अपना शरीर त्याग दिया था। तो यह किसी आतंकवादी समूह की कुछ राजनीति के परिणामस्वरूप है। तो, इसके साथ मैं हरे कृष्ण महा-मंत्र का जप करना चाहूँगा: "हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे / हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे"!
मैं यथासंभव लंबे समय तक कार्यक्रम मे भाग लेने का प्रयास करूँगा। मुझे बांग्लादेश के भक्तों के लिए एक विशेष प्रार्थना सभा में जाना है। सफल दामोदर (आउटरीच) बाह्य लोक संपर्क कार्यक्रम के लिए मेरी शुभकामनाएँ और आशीर्वाद। यशोदा दामोदर मतिर अस्तु!
परम पूज्य श्रील जयपताका स्वामी द्वारा 16 अक्टूबर 2021 को श्री धाम मायापुर, भारत में दिए गए संभाषण का अंश।
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