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20210628 प्रश्नोत्तर सत्र

28 Jun 2021|Duration: 00:10:45|हिन्दी|प्रश्नोत्तर सत्र|Transcription|Śrī Māyāpur, India

सत्यराजा गोविंद दास, यूएसए: क्या हमें "अच्युत शाक" अब भी कहीं मिलता है?

जयपताका स्वामी : मैं मात्र यही विचार कर रहा था कि मायापुर में हमें एक "शाक उत्सव" करना चाहिए ताकि हम भिन्न भिन्न प्रकार के शाक दिखा सकें। मुझे ज्ञात नहीं है कि यूएसए में कौन से शाक उपलब्ध हैं। परन्तु यहाँ मायापुर में कई प्रकार के शाक हैं । हेलंचा या हिरमिचा शाक , जो एक कमल के तालाब में सतह पर मिलता है। अमेरिका में जहां भी आपके पास कमल का तालाब है, वहां आप हेलंचा शाक उगा सकते हैं। इसके अतिरिक्त , रूस! मुझे ज्ञात नहीं कि उनके पास कमल के तालाब हैं या नहीं!

लक्ष्मी राधा देवी दासी : हाल की कक्षा में यह उल्लेख किया गया था कि यदि एक परिवार में एक शुद्ध भक्त है, तो उसकी चौदह पीढ़ियों का उद्धार होता है। तो जैसे की ,अद्वैत आचार्य के बच्चो के विषय में, स्मार्थ -ब्राह्मण पुत्रों की भाँति भक्त नहीं हैं, तो क्या वे भी मुक्त हो जाएंगे और आध्यात्मिक लोक में प्रवेश करेंगे?

जयपताका स्वामी : आपको एक शुद्ध भक्त बनाना होगा । यदि आपकी दो संतानें हैं, तो एक को शुद्ध भक्त बनाइए।

मरीना, क्रास्नोडार, रूस: क्या मैं संन्यास का व्रत ले सकती हूं? मैंने आपको इसके बारे में एक पत्र में लिखा था। आपके चरण कमलों से कृपा के सागर के लिए धन्यवाद।

जयपताका स्वामी : संन्यास महिलाओं के लिए नहीं है। महिलाओं की रक्षा उनके पिता, पति या बड़े पुत्र द्वारा की जानी चाहिए। यदि कोई महिला अकेले संन्यासी की भाँति रहती है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार हो सकता है। अतः महिलाओं की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

कृष्ण नामानंद प्रभु : हमें अमरीका में १०-१५ प्रकार के शाक मिलते हैं ।

जयपताका स्वामी : आपको उस रहस्य को अन्य भक्तों को बताना चाहिए।

दिव्यांगी ललिता देवी दासी, ओमाहा, यू.ए.सए : क्या आप कृपया हमें बता सकते हैं कि प्रसाद ग्रहण कर के अपनी इंद्रिय तृप्त करने की मनोवृत्ति को कैसे दूर किया जाए और प्रसाद का सम्मान करने के लिए उचित मनोदशा किस प्रकार विकसित की जाए?

जयपताका स्वामी : ओ.. मा.. हा.. ओम तत सत ! भगवान चैतन्य ने दिखाया, उन्होंने प्रसाद को आदर से प्रणाम किया, प्रसाद की परिक्रमा की, और बड़े सम्मान के साथ उन्होंने प्रसाद का सम्मान किया। इससे अधिक मैं क्या कहूँ?

प्रश्न तमिल में : क्या पत्ता गोभी को शाक माना जाता है। क्या धनिया, पुदीना, करी पत्ते को शाक माना जाता है? और कुछ शाक केवल बंगाल में उपलब्ध हैं जो तमिलनाडु में उपलब्ध नहीं हैं। तो इन चीजों को भगवान चैतन्य महाप्रभु को कैसे अर्पित करें?

जयपताका स्वामी : आप शाक उगा सकते हैं । बीज प्राप्त करें। मुझे ज्ञात नहीं यदि पालक तकनीकी रूप से एक शाक है । हम इसे शाक की भाँति तैयार कर सकते हैं । सामान्य रूप से, मुझे ज्ञात नहीं कि बंद गोबी या पत्ता गोभी को शाक माना जाता है या नहीं। करी पत्ता एवं धनिया पत्ती एक प्रकार का मसाला है। तो ये विभिन्न सब्जियों और चीजों के पत्तों की भाँति हैं। तो कदाचित इनमे से कुछ चीजे तमिलनाडु में हैं, और उनके पास पोटाल और कद्दू के पत्ते हैं। तो हमे भक्तों से विभिन्न शाकों की एक विस्तृत सूची बनाने को कहे और तमिल भक्त देख सकते हैं कि तमिलनाडु में कौन से शाक उपलब्ध हैं।

मथुरा लीलेश्वरी देवी दासी, गीता नगरी : यहाँ अनेक प्रकार की चर्चाये है की हम बच्चो को गुरुकुल के विरोध में, विद्यालय भेजे, घर पर शिक्षण कराये या भक्तजन जो विद्यालय चलाते हैं वहां भेजे ? ऐसा स्थान जहां कोई भक्त संचालित विद्यालय या गुरुकुल नहीं है, क्या यह ठीक है की हमारे बच्चों को घर पर कृष्ण भावनामृत आत्मसात् करने में सहायता करे एवं कर्मी संचालित विद्यालय में भेजे?

जयपताका स्वामी : मुझे प्रतीत होता है कि आपको विद्यालय देखना चाहिए । स्थिति क्या है देखनी होगी । मेरे दक्षिण अमेरिकी शिष्यों में से एक, उसकी बेटी विद्यालय गई, और भूल से उन्होंने उसके लंच बॉक्स को मांसाहारी बॉक्स से बदल दिया। उन्होंने विद्यालय जाकर शिकायत की । यह कार्तिक या दामोदर मास था। तो विद्यालय ने कहा, ओह, आप सभी छात्रों के साथ दीपदान तैयार कर सकते हैं? तो फिर वे मोमबत्तियां लाए और सभी छात्रों ने यशोदा दामोदर को दीपक अर्पित किए । तो आप देख सकते हैं कि यह किस तरह का विद्यालय है। चाहे वह धर्म संस्थाश्रित विद्यालय हो। कहना कठिन है। मुझे ज्ञात नहीं कि आप एक संन्यासी से ये बातें क्यों पूछते हो । आपको गृहस्थों से पूछना चाहिए!

प्रश्न : जैसे अच्युतानंद, वे अद्वैत आचार्य के योग्य पुत्र थे और उन्हें भगवान् चैतन्य और भगवान् नित्यानंद की कृपा प्राप्त थी, क्या अद्वैत आचार्य के कोई अयोग्य पुत्र भी थे?

जयपताका स्वामी : उनके छह पुत्र थे । तीन भक्त थे, और तीन स्मार्थ थे।

- END OF TRANSCRIPTION -
Transcribed by अजित मधुसूदन दासहिंदी अनुवाद अजित मधुसूदन दास द्वारा
Verifyed by प्रीति उपाध्याय द्वारा सत्यापित
Reviewed by व्रजकृष्ण दास द्वारा समीक्षित

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