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20211015 प्रभुपाद पधार रहे हैं - उत्सव व्याख्यान

15 Oct 2021|हिन्दी|प्रभुपाद कथा|Transcription|Śrī Māyāpur, India

अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरुवे नम : ।।
नम ॐ विष्णुपादाय कृष्णप्रेष्ठाय भूतले
श्रीमते भक्तिवेदांतस्वामिन् इति नामिने ।
नमस्ते सारस्वते देवे गौरवाणी प्रचारिणे
निर्विशेष शून्यवादि पाश्चात्यदेश तारिणे
मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारिणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ॐ तत् सत्

 जयपताका स्वामी: तो हमने ब्रज विलास प्रभु से सुना कि हम श्रील प्रभुपाद को दस लाख डॉलर की दक्षिणा देना चाहते हैं, और यह कि हम पूर्व में ही $ 800,000 एकत्र कर चुके हैं, हमे अभी $ 200,000 से कम की आवश्यकता है, जो कि एक करोड़ रुपये से थोड़ा सा अधिक है। तो, मुझे विश्वास है कि आप इसका लाभ उठा सकते हैं, आप वर्तमान में अभी, दक्षिणा दे सकते हैं या तो अभी प्रतिज्ञा कर के, बाद में दक्षिणा दे सकते हैं, अतएव हम श्रील प्रभुपाद के लिए यह दक्षिणा दे सकते हैं। वास्तव में , वैदिक तारामंडल के मंदिर (TOVP) में इतने बड़े जनसमूह के साथ यह पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है। हम देख सकते हैं कि यह मंदिर कक्ष अति विशाल है, अत्यंत पर्याप्त है और भक्तों की एक अत्यंत ही उत्साही संगति यहाँ एकत्रित है। यद्यपि मुझे प्रतीत होता है कि अभी भी यहाँ और अधिक जनसमूह एकत्रित होगा । इतने लोग श्रीविग्रह की पूजा करने आएंगे। वास्तव में जैसा कि स्वाहा देवी दासी ने कहा था, भगवान् नित्यानंद, उन्होंने जीव गोस्वामी के साथ (गौर मंडल) परिक्रमा पर जाते समय ये भविष्यवाणी की, कि

" एक अद्भूत मंदिर होइबे प्रकाश,
गौरांगेर नित्य-सेवा होइबे विकास"।

हम आशा करते हैं कि इस मंदिर से उस भविष्यवाणी की पूर्ति हो। इस विषय में हम अम्बरीश प्रभु और स्वाहा देवी दासी के अत्यंत आभारी हैं । वास्तव में , गृहस्थों में, पति-पत्नी एक हो जाते हैं। आज वे दोनों हमारे साथ हैं, हमारे पास एक पूर्ण इकाई है! और फलतः यह मंदिर कितना सुंदर है यद्यपि अभी यह आंशिक रूप से पूर्ण हुआ है।

 श्रील प्रभुपाद की इच्छा, भगवान् चैतन्य के संकीर्तन आंदोलन को सम्पूर्ण जगत् में प्रसारित करने की थी। उन्होंने वृंदावन में लोगों से कहा कि वे पश्चिम जाना चाहते है। भगवान् चैतन्य ने भविष्यवाणी की थी कि उनका संदेश सम्पूर्ण जगत् में प्रसारित किया जाएगा परन्तु वृंदावन के अन्य साधुओं ने कहा, 'ओह, यह सभ्य जगत् के लिए नहीं है, यह भारत के लिए है'। उन्हें विश्वास नहीं था कि यह पूरे विश्व में प्रसारित हो सकता है। पृथ्वी का अर्थ है, सम्पूर्ण विश्व में । कैसे श्रील प्रभुपाद के पास भगवान् चैतन्य के संदेश के विषय मे यही बात थी, और वे पश्चिम गए और इस प्रकार यह महान यज्ञ प्रदान किया। उस समय उनके पास इतना बड़ा भक्त समूह नहीं था - उनके पास केवल कुछ श्रीमद्-भागवतम् की पुस्तकें थी और वे स्वयं थे। एक व्यक्ति ने पूछा, "क्या आप पश्चिम जा रहे हैं?" उन्होंने कहा, "श्रीमद्-भागवतम् जा रहा है, मैं उनके साथ जा रहा हूँ ।" हम सभी को ज्ञात हैं कि श्रीमद्-भागवतम् भगवान् श्री कृष्ण का साहित्यिक अवतार हैं। जब मैं 1968 में मंदिर आया, तो प्रथम दिन मुझे श्रीमद्-भागवतम् के पहले सर्ग की एक प्रति बेची गई तो इस प्रकार मुझे आशीर्वाद प्राप्त हुआ । और श्रील प्रभुपाद ने निश्चित रूप से 10वें सर्ग तक श्रीमद्-भागवतम् का अनुवाद किया। पुनः उनके शिष्यों को 10वें सर्ग को पूर्ण किया और 11वें और 12वें सर्ग को पूर्ण किया। उन्होंने श्री चैतन्य-चरितामृत , श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप, और कई अन्य छोटी पुस्तकों का अनुवाद भी किया और कृष्ण पुस्तक, जो कि 10वें सर्ग का संक्षिप्त रूप है।

श्रील प्रभुपाद कई बार मायापुर आए थे, सामान्यतः वे वर्ष में लगभग दो बार आते थे । वे गौर पूर्णिमा के समय आए और उन्होंने कहा कि विश्व भर से भक्तों को गौर पूर्णिमा के समय मायापुर में यहाँ एकत्रित होना चाहिए। उस समय श्रील प्रभुपाद भी आ गए। कार्तिक से ठीक पहले, या कार्तिक के बाद, सामान्यतः वे कार्तिक मास वृंदावन में व्यतीत करते थे। परन्तु यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि वे सितंबर या अक्टूबर में मायापुर आते थे और हम लोगों को लोटस भवन के प्रांगण में देखते थे, और जब हमने उनकी कार को देखा, तो दूर से हमने सायरन बजाया, ऐसा उत्साह था! " जय हो! श्रील प्रभुपाद आ रहे हैं!" ब्रज विलास प्रभु, अम्बरीश प्रभु और स्वाहा दासी को धन्यवाद, जिन के अथाह प्रयासों के कारण, हम श्रील प्रभुपाद की उसी स्मृति का पुनः आस्वादन कर रहे हैं जो हमें वही परमानंद प्रदान कर रहा है! उस समय, हमारे पास श्रील प्रभुपाद को प्रदान करने के लिए बहुत अधिक नहीं था। भवन अधूरा था, उनकी उपस्थिति में भवन बनकर तैयार हुआ। और हम आशा करते हैं कि पुनः यहाँ TOVP, वैदिक तारामंडल का मंदिर भी श्रील प्रभुपाद की उपस्थिति में शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएगा। हमें आशा है कि अगले एक या दो घंटे में दस लाख डॉलर की प्रतिज्ञा का लक्ष्य पूर्ण होगा। आशा है आप सब इस विषय में सोच रहे होंगे।

तो यह एक महान अवसर है जिस पर हमें श्रील प्रभुपाद को धन्यवाद देना है, कि श्रील प्रभुपाद ने, उन्होंने वैदिक तारामंडल के इस मंदिर TOVP के निर्माण के अपने सपने को साकार करने में हमारी सहायता की। मैं सभी भक्तों, अम्बरीश प्रभु, स्वाहा देवीदासी और मंदिर को इस स्तर तक लाने के लिए कड़ा परिश्रम करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ । हम परिसर के पश्चिमी भाग पर भी काम कर रहे हैं कि किस प्रकार वैदिक तारामंडल के मंदिर के संग्रहालय का प्रदर्शन किया जाए? तो यह मस्तक पर सुशोभित आभूषण "मुकुट" है, हमारे उपदेशक भगवान् चैतन्य महाप्रभु के मस्तक पर सुशोभित आभूषण, शिरोंमणि है । उस मुकुट पर दुर्लभ रत्न यह मंदिर है।

तो श्रील प्रभुपाद उन्होंने अथक प्रयास से पूरे विश्व में भ्रमण किया, व्यक्तिगत रूप से 108 मंदिरों की स्थापना की। पुनः उन्होंने हमें बताया कि वे अत्यंत चिंतित थे कि उनके जाने के पश्चात् कम से कम हम उनकी संपत्तियों को नहीं बेचेंगे। कि येनकेन प्रकारेंण, कम से कम उन्होंने जो किया उसे हम यथावत् सुरक्षित रखें और यदि संभव हो तो हम इसे बढ़ा भी सकते हैं। परंतु आज मुझे प्रतीत होता है कि हमारे पास लगभग 800 मंदिर हैं, हजारों भक्ति-वृक्ष समूह हैं, नामहट्ट समूह हैं, और गीता-चक्र इत्यादि हैं तो, श्रील प्रभुपाद की कृपा से हर कोई भगवान् चैतन्य महाप्रभु और पंच-तत्त्व के संदेश का प्रचार करने के लिए प्रेरित होता है। तो, कृपया इसे जारी रखें और इससे श्रील प्रभुपाद अत्यंत प्रसन्न होंगे।

मैं अधिक समय तक नहीं बोलूंगा क्योंकि अन्य कार्यक्रम भी हैं।

- END OF TRANSCRIPTION -
Transcribed by प्रतिलेखन का हिंदी अनुवाद प्रीति उपाध्याय द्वारा
Verifyed by अजित मधुसूदन दास द्वारा सत्यापित
Reviewed by भवानन्दिनी देवी दासी द्वारा समीक्षित

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