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20210925 प्रश्न और उत्तर सत्र

25 Sep 2021|हिन्दी|प्रश्नोत्तर सत्र|Śrī Māyāpur, India

मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ओम् तत् सत्

ललितांगी राधा देवी दासी: हम राधा, कृष्ण और गोपियों की लीला कब पढ़ सकते हैं?

जयपताका स्वामी: यथार्थ रूप से, श्री चैतन्य-चरितामृत में रास-लीला का कुछ विवरण दिया गया है। यदि कोई भौतिक यौन जीवन के बारे में सोचकर उत्तेजित अनुभव करता है, तो वे राधा और कृष्ण की रास-लीला की लीलाओं को सुनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं । जहां तक पिछले आचार्यों की कौन-सी पुस्तकें पढ़नी हैं, देखें कि सभी पुस्तकें एक समान नहीं होतीं। श्रील प्रभुपाद ने रूप गोस्वामी द्वारा लिखित भक्ति-रसामृत-सिंधु का अनुवाद किया, जो अध्ययन के लिए उचित है। इसके अतिरिक्त , उपदेशामृत तथा श्री चैतन्य चरितामृत हमारे पूर्ववर्ती आचार्यों द्वारा लिखित है ।

तो यदि व्यक्ति कृष्ण भावनामृत मैं नौसीखियां है तो उसे श्री राधा कृष्ण के गोपनीय कार्यकलाप एवम लीलाओं के विवरण से दूर रहना हितावह होगा ।

अतः आपको पहले श्रीमद्-भागवतम पढ़ना होगा और उसके बाद, आप गोपनीय विषयों पर जा सकते हैं, यदि आप उत्तेजित न हों तो ।

शांता गोपी देवी दासी (तमिल): नवद्वीप में राधा-कुण्ड की तरह वृन्दावन के कुछ मनोरंजन लीला स्थल प्रकट हुए हैं। उसी प्रकार क्या भगवान् श्री कृष्ण की सभी लीला स्थलियाँ जो हमने भगवान् चैतन्य महाप्रभु की इन वृंदावन परिक्रमा में देखीं, क्यांं वही स्थान नवद्वीप में भी उपस्थित हैं?

जयपताका स्वामी: भगवान् श्री कृष्ण ने श्रीमती राधारानी से कहा कि वृन्दावन धाम के 12 वन नवद्वीप धाम में प्रकट होंगे। परंतु हमें अभितक कुछ ज्ञात है और कुछ ज्ञात नहीं है, की वे सब कहां है । इसी प्रकार, वृंदावन के विभिन्न मनोरंजन स्थल नवद्वीप में प्रकट हुए हैं। और कृष्ण ने कहा कि वे सब नवद्वीप में होना चाहिए, किंतु हम नहीं जानते । इसी प्रकार लीला स्थल हैं परंतु हम अभी तक वे सब प्राप्त नहीं कर पाएं हैं।

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Transcribed by हिंदी अनुवाद शशि मुखी केशवी देवीदासी द्वारा
Verifyed by अजित मधुसूदन दास द्वारा सत्यापित
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