मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ॐ तत् सत्॥
जयपताका स्वामी: तो मैंने कहा कि मैं तीन प्रश्नों का उत्तर दूंगा - दो फेसबुक अंग्रेजी से और एक फेसबुक बंगाली से।
प्रश्न: भगवान् चैतन्य का शरीर द्रवीभूत होता है , क्या यह लाक्षणिक है या वास्तविक है ।
जयपताका स्वामी: जैसा कि हमने परम पूज्य श्रील जय अद्वैत महाराज से कहा, कि भगवान् चैतन्य कुछ भी कर सकते हैं। वह तरल हो सकते है, फिर वह ठोस भी बन सकते है। हम उसके परे कुछ नहीं कह सकते। भगवान् सब कुछ कर सकते है! जैसे भगवान् ने पेड़ों को देखा, और उन्होंने अनुपयुक्त ऋतु में भी फूल उत्पादित किए। तो उस तरह जब वे अत्यंत उन्मादित होते थे, वे प्रसन्न होते, तब भगवान् चैतन्य प्रसन्नता पूर्वक अद्भुत नृत्य करते और जैसे हम पूर्व में बता चुके है, जब उन्होंने वृंदावन सुना, तो उनका परमानंद सौ गुना वर्धित हो गया। जब वे मथुरा में थे, उनका परमानंद हज़ार गुना वर्धित हो गया, और जब वे वृंदावन में थे, तो उनका परमानंद दस हजार गुना वर्धित हो गया था! यह अकल्पनीय है! उनका नैसर्गिक परमानंद इतना महान है, और इसे दस हजार बार कैसे गुणित किया गया, यह अकल्पनीय है! हरे कृष्ण!
इक्ष्वाकु दास: मैंने थोडे दिन पूर्व एक प्रतिष्ठित इस्कॉन संन्यासी से सुना है कि हरि-भक्ति-विलास एक शास्त्र नहीं है चूंकि यह साधु और गुरु की श्रेणी में आता है अतः इसके कथनों को पूर्ण अर्थ में नहीं लिया जा सकता है। शास्त्र के रूप में क्या सुविचारित या स्वीकार किया जाता है, इसका मापदंड क्या है, क्योंकि मान्यता प्राप्त शास्त्रों के कई कथन साधुओं और गुरुओं से प्राप्त हैं, विशेष रूप से भगवान से नहीं, उदाहरणार्थ श्रीमद्-भागवतम्, श्रीमद् भगवद्-गीता आदि?
जयपताका स्वामी: हरि-भक्ति-विलास विभिन्न शास्त्रों के उद्धरणों का एक संग्रह है, जिसे सनातन गोस्वामी द्वारा प्रस्तुत किया गया था। तो इन उद्धरणों को प्रस्तुत किया गया, जैसे भीष्म-पंचक का पालन करने की प्रणाली क्या है। तो वह विभिन्न वेदों, विभिन्न शास्त्रों, पुराणों को उद्धृत करते है। तो जिस व्यक्ति ने आपको यह बताया है, उन्हें ज्ञात नहीं कि श्रील सनातन गोस्वामी क्या कर रहे थे। उन्होंने अपने विचार नहीं लिखे, उन्होंने विभिन्न शास्त्रों को हरि-भक्ति-विलास में उद्धृत किया है।
हरे कृष्ण!
Lecture Suggetions
-
20210605 श्रीमद्-भागवतम् 1.8.52
-
20210612 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.10
-
20211121 रशियन दूसरी पीढ़ी के शिष्यों को संबोधन
-
20210525 श्रीमद् भागवतम् 7.6.19
-
20211122 श्रील प्रभुपाद पुस्तक वितरण मेराथोन उद्घाटन भाषण
-
20211030 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.18
-
20210619 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.17
-
20211106 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.23
-
20210628 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव - इस्कॉन पूर्व और पश्चिम बंगाल को उद्बोधन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभवदिवस पर इस्कॉन गंगटोक और अंबाला भक्तों को संबोधन
-
20210701 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20211017 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.2
-
20211014 श्रील प्रभुपाद आ रहे हैं - सम्प्रदाय सम्मेलन को संबोधन
-
20211016 दामोदर महोत्सव वैश्विक उद्घाटन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मलेशिया और पर्थ को उद्बोधन
-
20210717 जीबीसी एसपीटी (रणनीतिक योजना टीम) के साथ साक्षात्कार
-
20210807 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.11-12
-
20211016 बांग्लादेश भक्तों के लिए संदेश
-
20210702 श्री गौर मंडल भूमि परियोजना संभाषण
-
20210801 भाद्र पूर्णिमा विशेष अभियान संबोधन
-
20211017 इस्कॉन चेन्नई के पासाना उत्सव को संबोधित करते हुए
-
20210830 श्रीमद्-भागवतम्
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन तिरुपति को उद्बोधन
-
20211003 प्रश्न और उत्तर, परम पूज्य जयपताका स्वामी के साथ
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मायापुर को उद्बोधन
-
20210828 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.33-35
-
20210731 श्रीमद्-भागवतम् १.१०.४
-
20210711 गोलोक - भद्रा पूर्णिमा-श्रीमद-भगवतम अभियान संबोधन
-
20210801 संबोधन: इस्कॉन जापान भक्ति-शास्त्री प्रमाण पत्र पुरस्कार समारोह
