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20210918 गोलोक चलो- भाद्र अभियान 2021

18 Sep 2021|हिन्दी|Others|Transcription|Śrī Māyāpur, India

मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ओम् तत् सत्

जयपताका स्वामी : आज वामन द्वादशी का शुभ दिवस है और श्रील जीव गोस्वामी का शुभ प्राकट्य दिवस है। कल श्रील भक्तिविनोद ठाकुर का प्राकट्य दिवस है। उसके उपरांत दिनांक 20 को भाद्र पूर्णिमा है। तो श्रीमद्-भागवतम् में यह उल्लेख है कि जो भाद्र पूर्णिमा पर भागवतम् की आराधना करता है तथा जो भागवतम् का वितरण करता है , वह आध्यात्मिक जगत में जाता है। चूँकि श्रीमद्-भागवतम् का  मुख्य विषय भक्तिमय सेवा है और वह भक्ति शाश्वत है, ब्रह्मांड के नष्ट होने पर भी उसका विनाश नहीं होता है। वास्तव में भगवान् श्रीकृष्ण, वे एकमात्र उन्हें ही भक्ति देते हैं जो पूर्णतया उनके प्रति समर्पित हैं। किंतु  भगवान् चैतन्य ने इसे स्वतंत्र रूप से वितरित  किया और उन्होंने यह नहीं सोचा कि कौन योग्य है, कौन नहीं, उन्होंने इसे सभी को मुक्तरीति से दिया। हम भगवान् चैतन्य के आंदोलन में सम्मिलित होने के कारण अत्यंत भाग्यशाली हैं ।

भगवान् चैतन्य ने सिखाया है कि विशेष रूप से हमें कृष्ण की शिक्षा - भगवद् गीता और श्रीमद्-भागवतम् का अध्ययन करना चाहिए। चूँकि श्रीमद्-भागवतम् भक्तिमयी सेवा का महिमामंडन करता है, इसके समान कोई अन्य साहित्य, कोई अन्य शास्त्र नहीं है। अधिकांश लोग कुछ भौतिक लाभ के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। किंतु श्रीमद्-भागवतम् के अध्ययन से ज्ञात होता है कि कैसे शुद्ध भक्ति में भगवान् की सेवा करना, जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि है।  जो लोग श्रीमद्-भागवतम् प्राप्त करते हैं, वे विशेष रूप से भाग्यशाली है।  हम श्रीमद्-भागवतम् को महाविद्यालयों के पुस्तकालयों, विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों में दे रहे हैं । श्रील प्रभुपाद चाहते थे कि हर सज्जन के घर में श्रीमद्-भागवतम् हो। हम श्रीमद्-भागवतम् की महिमा को कम नहीं आंक सकते। यद्यपि जो अपने घर में श्रीमद्-भागवतम् रखते हैं, हमें समझना चाहिए कि भागवतम्, भगवान् का एक साहित्यिक अवतार है। 12 सिद्धांत देवता हैं, वे आते हैं और श्रीमद्-भागवतम् को प्रणाम करते हैं। पहले, श्रीमद्-भागवतम् ताड़ के पत्तों पर हस्तलिखित था। और अब हमारे पास भागवतम्,  कागज पर छपा हुआ है और यह अत्यंत सरलता से उपलब्ध है। श्रीमद्-भागवतम् की शरण लेने से एक मूर्ख व्यक्ति के समक्ष भी भगवान् अपने रहस्यों को प्रकट करते है। श्रीमद्-भागवतम्, भगवान् कृष्ण की गोपनीय लीलाओं को प्रकट करता है।

जैसे कृष्ण के अनंत रूप हैं , वैसे ही वे विभिन्न अवतारों के रूप में प्रकट होते हैं। जैसे वामनदेव, नृसिंहदेव, मत्स्य, वराहदेव। एक अभिनेता की भाँति , एक ही व्यक्ति किंतु वह विभिन्न भूमिकाएँ निभाता है।

इस प्रकार  पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान्  एक है परंतु उनके असीमित रूप और लीलाऐं हैं। सभी शास्त्रों में उल्लेख है कि कृष्ण की भक्तिमयी सेवा की संस्तुति की जाती है। किंतु श्रीमद्-भागवतम्, विशेष रूप से भगवान् कृष्ण के प्रति भक्तिमय सेवा पर केंद्रित है। प्रारंभ में,  मध्य में और अंत में श्रीमद्-भागवतम्, भगवान् श्री हरि की भक्तिमय सेवा की महिमा का गान करते हैं। अतः हम आशा करते हैं कि मध्य पूर्व  में प्रत्येक व्यक्ति इसका लाभ उठाएगा और किसी प्रकार  श्रीमद्-भागवतम् को वितरित करने में हमारी सहायता करेगा।

भगवान् चैतन्य ने देवानंद पंडित को श्रील प्रभुपाद की महिमा के विषय में बताया था। हम आशा करते हैं कि मध्य पूर्व में सभी के पास श्रीमद्-भागवतम् की एक प्रति है। यदि

हमारे पास मध्य पूर्व में यह नहीं हो सकता है, तो कम से कम इसे भारत में अपने घर में रखें। आपने पहले ही अन्य वक्ताओं और भक्ति पुरुषोत्तम स्वामी से सुना है कि आप इस  भाद्र  पूर्णिमा अभियान में कैसे भाग ले सकते हैं। हम मध्य पूर्व के सभी भक्तों को धन्यवाद देते हैं जो भारत, नेपाल और बांग्लादेश में विभिन्न परियोजनाओं में विभिन्न प्रकार से सहायता कर रहे हैं।

हम आशा करते हैं कि श्रीमद्-भागवतम् की कृपा से हम सब भगवान् के धाम पुनः जाएंगे । तो, मुझे आशा है कि हर व्यक्ति  श्रीमद्-भागवतम् का अत्यंत ध्यान से अध्ययन करता है तथा आप अपने जीवन में शुद्ध भक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

हरे कृष्ण!

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Transcribed by प्रतिलेखन का हिंदी अनुवाद: सर्वप्रिय केशवी देवी दासी
Verifyed by सत्यापित : अजित मधुसूदन दास
Reviewed by समीक्षित : भवानन्दिनी देवी दासी

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