मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ॐ तत् सत्॥
मरीचि दास, आतिथेय : यदि आप हमें कुछ परामर्श दें, तो
गुरुदेव, भक्तों को स्नेह प्रदान करना आपका स्वाभाविक गुण है। मेरा पहला प्रश्न यह है कि हम इस अद्भुत उपहार रूपी गुण को कैसे आत्मसात् कर सकते हैं और इसी से जुड़ा दूसरा प्रश्न, क्योंकि यह भी देखभाल के विषय में है। गुरु महाराज कई वर्षों से हमें ज्ञात हैं कि आप अपने शिष्यों की देखभाल करना चाहते थे। अब आपने जेपीएस केयर बनाया है और आपने जेपीएस ई-केयर भी बनाया है, और अब हमारे पास सारे विश्व में जेएसएसएस समूह हैं, हम आपको यह जानना चाहेंगे कि ये क्षेत्र शिष्यों की देखभाल करने की सेवा में आपकी मदद कैसे करेंगे? इन्हें कैसे संगठित किया जा सकता है और हम शिष्य के रूप में कैसे योगदान दे सकते हैं? हम आपसे इन तीन क्षेत्रों के बारे में बृहद दृष्टिकोण जानना चाहते हैं।
जयपताका स्वामी: तो मरीचि दास, आप मेरे अति प्रिय शिष्य हो। जैसा कि जगन्नाथ कीर्तनानंद ने बताया, आपने कई लोगों के ह्रदयों को स्पर्श क़िया है। देवमाधव प्रभु, उन्होंने युवा लोगों की देखभाल करने का अपना विचार भी दिया है । वह मुझे स्मरण दिलाता है जो श्रीधर स्वामी महाराज ने मुझे निर्देश दिया था, "यदि आप दानदाताओं से
पैसा चाहते हैं, तो वे आपको सलाह देंगे किन्तु आप उनसे सलाह मांगेंगे, तो वे पैसे देंगे", यह रोचक है! वह कह रहे है कि "यदि आप लोगों की देखभाल करेंगे तो वे अपने प्राण दे देंगे। यदि आप उनका जीवन चाहते हैं तो वे आपको कुछ नहीं देंगे", ऐसा कुछ।
निःसंदेह , शिष्य गणों द्वारा मायापुर में हर गुरुवार को एक JSSS कार्यक्रम होता है। तो मैंने सुना कि लगभग 2000 लोग इसमें सम्मिलित होते हैं। किन्तु किसी प्रकार , वैश्विक JSSS का कहना है कि उनके पास 952 सदस्य हैं। मुझे ज्ञात नहीं कि क्या यह सही है। परंतु जो कुछ भी है, वे मेरे साथ शिष्यों को जोड़ने में सहायता कर रहे हैं। शिष्यों द्वारा शिष्यों की सहायता करना, श्रीमान शब्दहरि दास ने अपने अनुभवों को बताया , सोशल मीडिया पर पोस्ट पढ़कर, जिसका श्रीमान जानकी रामचंद्र दास संधारण करते है या जयपताका स्वामी ऐप का भाग बनकर, जिसका श्रीमान सत्यमेध गौरांग संधारण करते है।
ये सभी वस्तुत: श्रील प्रभुपाद के लक्ष्य को पूरा करने में
सहायता करने के लिए हैं। श्रील प्रभुपाद ने मुझसे कई शिष्य बनाने के लिए कहा या निर्देश दिया। परन्तु तब मुझे अनुभव हुआ कि शिष्य बनाना एक तथ्य है, जैसा कि कस्तूरी मंजरी कृपा देवी दासी ने कहा, उन्हें भक्ति में बनाए रखना दूसरा तथ्य है। और हम शिष्यों को बनाए रखना चाहते हैं। कभी-कभी हम सुनते हैं कि शिष्य अपना नामजप छोड़ देना पसंद करते हैं, और वे सोचते हैं, ठीक है, भौतिक संसार में अभी भी दुख है। उन्हें कुछ मिथ्या अपेक्षाएं रहती हैं कि किसी प्रकार भक्त होने से यह भौतिक संसार अमृत बन जाता है । भौतिक जगत, एक भौतिक जगत है, और कृष्ण की कृपा से आप इसके सबसे बुरे अनुभव से बच जाते हैं। हम सोचते हैं कि मुझे जो भी दुःख मिल रहा है, मैं जिसके योग्य था उसकी तुलना में अत्यंत कम है |
अतः हम चाहते हैं कि लोग जेपीएस केयर में भाग लें, हम चाहते हैं कि लोग जेएसएसएस में सम्मिलित हों और हम सारे विश्व में जेएसएसएस के लिए उनके प्रयासों के समन्वय के लिए आभारी हैं। वास्तव में, हम देख सकते हैं कि तकनीकी रूप से, वे बहुत अच्छी तरह से संगठित हैं। कुछ शिष्यों ने आकर टिप्पणी की कि शब्दहरि दास और अन्य
अत्यंत सुचारू रूप से संगठित हैं। मैं अत्यंत आभारी हूँ, हम चाहते हैं कि येन केन प्रकारेण भक्त गण इस वैष्णव संघ से जुड़े रहें। मैंने उल्लेख किया कि जेपीएस केयर में हम इच्छुक, आश्रय, दीक्षित, शिक्षा और शुभचिंतक शिष्यों या भक्तों की देखभाल करना चाहते हैं। परंतु अभी मुझे नहीं ज्ञात, लगभग 20% संपर्क नवीनतम (अप टू डेट) हैं। अधिकतर भक्त का संपर्क सेतु कार्यरत नही है , उनके मेल बाउंस होते हैं, फोन से प्रतिउत्तर नही मिलता। और लोग अपना ईमेल बदलते हैं, जब वे बदलते हैं तो वे हमें सूचित नहीं करते हैं। तो इस प्रकार , JSSS विभिन्न माध्यमों से हमारी सहायता कर सकता है।
अतः प्रतिदिन में मैं जो कुछ भी करता हूँ , जयपताका स्वामी एप पर पोस्ट करता हूँ । सेल्युलाइटिस के कारण दो दिन मैं मंगला आरती करने से चूक गया, परंतु आज मैंने मंगला आरती में भाग लिया और इसे ऐप पर अपलोड कर दिया। मैंने कुछ मंदिरों के दर्शन किये, सदा की भाँति नहीं, केवल ९ या १० , सामान्यत: २० या अधिक होते हैं ! और इसी प्रकार मैं JSSS वर्चुअल रिट्रीट में अपनी उपस्थिति की नवीनतम सूचना भी देता रहूंगा। तो मैं उतना ही करना
चाहता हूँ, मेरा तात्पर्य है, मैं किसी भी विचार का स्वागत करता हूँ । मैं इन सभी शिष्यों की देखभाल करना चाहता हूँ । मैं देखना चाहता हूँ कि वे वापस भगवान के पास जाएं। कृपया मेरी सहायता करें! श्रील प्रभुपाद ने कहा कि हमारे पास दसियों हज़ार, सैकड़ों, हज़ारो , लाखों, करोड़ों गुरु होने चाहिए। अपने जीवनकाल में, मैं संभवतः लाखों गुरुओं को न देख सकूं।
श्रील प्रभुपाद ने कहा कि हर किसी को भगवद् गीता और श्रीमद्-भागवतम् को जानना चाहिए। भगवान् चैतन्य की शिक्षाओं को जानें। तो कम से कम यदि भक्तों के पास भक्तिवेदांत की डिग्री होती, तो मैं कुछ सीमा तक आश्वस्त होता कि वे संदेश का प्रसार कर सकते हैं। मुझे ज्ञात नहीं कि क्या JSSS भक्तों को निर्देश देने में सहायता कर सकता है। परंतु वह है - श्रीमान अतुल कृष्ण ने मुझे बताया कि जो वरिष्ठ भक्त हैं, या जिन्होंने कई बार शास्त्र पढ़ा है, उनके पास श्रील प्रभुपाद की पुस्तकें हैं, उन्हें पाठ्यक्रम के माध्यम से जाने की आवश्यकता नहीं है, बस परीक्षा दें और डिग्री प्राप्त करें। तो मुझे प्रतीत होता है कि भक्त भी पाठ्यक्रम लेते हैं या वे श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों के पारंगत हैं, और वे
परीक्षाओं से अवगत हैं, इस प्रकार मैं अपने जीवनकाल में 500 शिष्यों को गुरु के स्तर तक उठाना चाहता हूँ। अभी हमारे पास केवल 100 गुरु हैं। मान लें कि 50 साल बाद वे सभी वृद्ध हो गए हैं और हम नहीं जानते कि वे कितने समय तक जीवित रहते हैं। लोगों को श्रील प्रभुपाद पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए, अपनी परीक्षा देनी चाहिए, अपनी डिग्री प्राप्त करनी चाहिए । इसके भिन्न, कुछ लोग जप नहीं करते हैं, उन्हें चिंता नहीं है, वे भक्तों के संपर्क से दूर हो गए हैं।
तो हमें देखना चाहिए कि कैसे जेपीएस केयर द्वारा, जेपीएस ई-केयर द्वारा, या जेएसएसएसएस द्वारा विश्व भर के विभिन्न समूहों द्वारा, लोगों को सम्मिलित करने के लिए, उन्हें प्रेरित करने के लिए, उन्हें हरि नाम का जप करने और कृष्णभावनामृ का अभ्यास करने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए। गुरुओं की क्या बात करें, बहुत से भक्त भी नहीं हैं, वे ह्रदय से भक्त हैं परंतु वे अधिक अभ्यास नहीं कर रहे हैं। आप के क्या विचार है ?
मरीचि दास: आपके शब्दों से मैं अत्यंत प्रभावित हुआ। आपने यह सब बताया । कोई अन्य व्यावहारिक माध्यम जिससे हम एक दूसरे की देखभाल कर सकें? जैसे मलेशिया में हम करते हैं। कुआलालंपुर में मंदिर प्रबंधन ने आपके उन सभी शिष्यों को खोज निकाला जिन्होंने अब तक देहत्याग हुआ है, कुल संख्या 75 है। उन्होंने जगन्नाथ मंदिर में क्या किया, हम प्रत्येक व्यक्ति के लिए भगवान् नृसिंहदेव को एक दीपक चढ़ाते हैं। साल में दो बार 75 दीपक वाली थाली - एक बार नृसिंह चतुर्दशी पर और एक बार दामोदर महीने में एकादशी के दिन और हमने उनके परिवारों को सूचित किया। और हर कोई इससे अत्यंत प्रभावित हुआ। न केवल दिवंगत आत्माओं के लिए, अपितु अस्वस्थ भक्तों के लिए एक और थाली, विशेष रूप से जब कई भक्त COVID से पीड़ित हैं, और एक और भक्तों तथा प्रायोजकों के लिए और यात्रा के आशीर्वाद के लिए। यह एक सरल उदाहरण है कि हम भक्तों की देखभाल कैसे कर सकते हैं।
जयपताका स्वामी: यह एक अत्यंत ही आनंदप्रद बात है जो वे मलेशिया में कर रहे हैं। और मुझे कई, अनगिनत, पत्र मिले थे;" मेरे चाचा का निधन हो गया है", "मेरी बहन करोना
से संक्रमित है" और मुझे उनके लिए प्रार्थना करने के लिए कह रही है। मैंने उनसे अपना पता covid@jayapatakaswami.com पर देने को कहा और मैंने उनके लिए भगवान् नृसिंहदेव से प्रार्थना की। इसलिए ये सभी वस्तुएँ हम इसलिए करते हैं तथापि वे स्वयं को अकेले अनुभव न करें। मैं उन्हें covid@jayapatakaswami.com पर लिखने के लिए कहता हूँ। इसी तरह मैं अन्य प्रकारों के बारे में भी विचारशील हूँ , परंतु मुझे प्रतीत होता है कि शब्दहरि दास, उन्होंने विभिन्न सुझाव दिए हैं और वे निश्चित रूप से अति व्यावहारिक लगते हैं। मुझे ज्ञात नहीं कि अभी और क्या कहना है।
मरीचि दास: आपके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। धन्यवाद।
जयपताका स्वामी: तो यह भी उत्तम होगा कि अधिक लोग JSSS समूहों में सम्मिलित हों। हरे कृष्ण! उनके पास परामर्श में एक विशिष्ट कार्यप्रणाली है, और यह भक्तों की
सहायता करने का एक माध्यम है। साथ ही शब्दहरि दास, उन्होंने "परामर्श देने के तरीके" पर पुस्तक लिखी है।
हरे कृष्ण!
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