19 दिसंबर, 2020 को भारत के श्रीधाम मायापुर में परम पावन श्री श्रीमद् जयपताका स्वामी महाराज द्वारा ज़ूम के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय जेएसएसएस जयपताका स्वामी शिष्य समुह बैठक में दिया गया एक संबोधन निम्नलिखित है।
नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले
श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।
नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे
निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥
जगन्नाथ कीर्तनानंद ने मुझे यह जेएसएसएस , जयपताका स्वामी शिष्य समुह, कार्यक्रम दिखाया। इस के पूर्व हम कदाचित बैठक कर रहे थे और भिन्न-भिन्न लोगों से बात करते हुए सुन रहे थे। किन्तु यह अवधारणा थोड़ी अधिक विस्तृत है। जैसा कि आप देखते हैं कि वे विभिन्न शीर्षक प्रस्तुत कर रहे हैं: जैसे देखभाल करना, संचार, बैठक, बहुत सी चीजें। मैं केवल इतना कहता हुँँ... हाल ही में मायापुर मैने शिष्य और भक्त देखभाल कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया है। यदि प्रत्येक जेएसएसएस, जयपताका स्वामी शिष्य समुह, में इस प्रकार का उन्नत प्रोग्राम है, तो यह अत्यंत सुचारु समन्वय होगा। और हम दीक्षित और शिक्षित दोनों ही शिष्यों की देखभाल कर सकते हैं । वैसे भी, यह एक अत्यंत सुंदर कार्यक्रम है जो वह प्रस्तुत कर रहे हैं।
मैं केवल इस बात का समर्थन करना चाहता हुँ कि यह अति महत्वाकांक्षी और उपयोगी दिशा है। अतएव हम लोगो की मदद करने का प्रयास करते हैं, क्योंकि मैं देखना चाहता हुँ कि हर कोई भगवद्धाम वापस जाए। और निश्चित रूप से आप इसमें मेरी मदद कर सकते हैं और हम उन भक्तों को वापस पाना चाहते हैं जो किसी तरह दूर चले गए हैं; अपने क्षेत्र के सभी भक्तों का ध्यान रखें।
तो पहले मैं विचार कर रहा था कि जेएसएसएस, जयपताका स्वामी शिष्य समुह, ऐसी प्रक्रिया हो, जो कोई स्थान पर, किसी समय, जहाँ भक्त विभिन्न वक्ताओं से श्रवण सकें। परन्तु यूके और आयरलैंड में, उन्होंने एक प्रकार का विस्तारित जेएसएसएस, जयपताका स्वामी शिष्य समुह, का आयोजन किया। और यह अत्याधिक प्रेरणादायक है। और यह निश्चित रूप से मुझे भक्तों की देखभाल करने और विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले भक्तों के लिए मुझे सूचित करने में अत्यंत सहायक होगा । वे मुझे सूचित कर सकते है। यह एक प्रारंभ है, परंतु यह सुचक है, यह सामान्य विचारधारा से विपरीत एक तरह की सोच है। तो, यदि आपके पास कोई और विचार है जो भी उपयोगी होगा। हरे कृष्ण!
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