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20201122 उज्जैन बेस भक्तों के साथ ज़ूम सत्र

22 Nov 2020|Duration: 00:09:14|हिन्दी|Youth Programs|Transcription|Śrī Māyāpur, India

मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री गुरुं दीन-तारणम् ॥
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम् ॥
हरि: ऊँ तत् सत्

जयपताका स्वामी: तो आज मध्य प्रदेश में आकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मध्य प्रदेश एक अति पवित्र धाम है। उज्जैन प्राचीन स्थानों, तीर्थों में से एक है, जहाँ कुंभ मेला आयोजित किया जाता है और श्रील प्रभुपाद ने मध्य प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम किए। श्री श्रीमद् भक्ति चारू महाराज भी मध्य प्रदेश में विशाल स्तर पर प्रचार कर रहे थे। श्रीमान महामन प्रभु भी मध्य प्रदेश में हैं। आज मध्य प्रदेश की यात्रा करके हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। हमें प्रसन्नता है कि भोपाल में विभिन्न गतिविधियाँ चल रही हैं और आज मैं बेस (BACEs)  का दौरा करने जा रहा हूँ।

श्रील प्रभुपाद ने कहा कि छात्र, बुद्धिमान युवा, वे समाज के रत्न होंगे और उन्हें मानव जीवन की सफलता प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए। जन्म और मृत्यु के इस संसार को पार करने में सक्षम होना चाहिए। शाश्वत, आध्यात्मिक जगत में लौटकर जाने में सक्षम होना चाहिए। भगवान् चैतन्य की कृपा है कि लोग सरलता से मानव जीवन की पूर्णता प्राप्त कर सकते हैं, हरि के पवित्र नाम का जाप करे।  तो, वास्तव में स्वयं कृष्ण और कृष्ण के नाम में कोई अंतर नहीं है। कृष्ण के नाम का जप करके कोई भी कृष्ण की व्यक्तिगत संगति को प्राप्त कर सकता है। हम यह भी जानते हैं कि भौतिक संसार में विभिन्न विकर्षण होते हैं और यह कि हम तटस्था-शक्ति या जीव-शक्ति हैं। हम या तो महामाया के वश में हो सकते हैं या योगमाया के। यदि हम शरीर के साथ तादात्म्य करते हैं तो हम महामाया की ओर आकर्षित होते हैं। यदि हम कृष्ण भावनाभावित हैं, आध्यात्मिक रूप से पहचाने जाते हैं, तो हम योगमाया के संरक्षण में हैं ।  तो हमारे पास विकल्प है,  हम महामाया के नियंत्रण में रहना चाहते हैं  या योगमाया के।

भगवान् चैतन्य, उन्होंने हमें कृष्ण भावनाभावित होने का निमंत्रण दिया। कृष्ण कृपामूर्ति अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने भगवान् चैतन्य के इस संदेश को संपूर्ण विश्व में फैलाया है और इस कार्य में श्री श्रीमद् भक्ति चारु स्वामी ने उनकी सहायता की। अब आपके पास एक विकल्प है, आप योगमाया या महामाया में से किसके संरक्षण में रहना चाहते हैं। ये ऊर्जाएँ बहुत प्रबल होती हैं और यदि हम योगमाया के संरक्षण में नहीं हैं, तो महामाया हमें भ्रमित कर देंगी। अतएव हम हमेशा कृष्ण और उनकी दिव्य शक्ति के अधीन रहने की स्थिति स्वीकार करते हैं। तथापि हम दिन भर में लगातार हरे कृष्ण का जप करते हैं, कम से कम 16 माला जप करने का हम प्रयास करते हैं। जो दीक्षित हैं, वे न्यूनतम 16 माला करते हैं। जो अभी तक दीक्षित नहीं हैं, वे कुछ कम जप कर सकते हैं। परंतु जितना अधिक हम कृष्ण की शरण लेंगे, उतना ही हम महामाया से सुरक्षित रहेंगे।

हरे कृष्ण!

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Transcribed by हिंदी अनुवाद महा गोपिका देवीदासी द्वारा
Verifyed by अजित मधुसूदन दास द्वारा सत्यापित
Reviewed by भवानन्दिनी देवी दासी द्वारा समीक्षित

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