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20201101 मलेशिया दामोदरा कार्यक्रम का उद्घाटन

1 Nov 2020|Duration: 00:18:22|हिन्दी|Others|Transcription|Śrī Māyāpur, India

1 नवंबर, 2020 को श्री धाम मायापुर, भारत में परम पावन जयपताका स्वामी महाराज द्वारा ज़ूम के माध्यम से मलेशिया दामोदरा कार्यक्रम का उद्घाटन निम्नलिखित है। 

मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्
यत्-कृपा तम अहम वन्दे श्रीगुरुं दीन-तारणं
परमानंदम माधवं श्री चैतन्य ईश्वरम्

Hariḥ oṁ tat sat!

जयपताका स्वामी: मलेशिया के दामोदर माह, कार्तिक माह के दीपदान उत्सव में उपस्थित होकर मैं अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। हम जानते हैं कि कृष्ण परमेश्वर हैं। उनके पास सब कुछ है, इसलिए उन्हें किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यदि हम उन्हें अपना प्रेम अर्पित करते हैं, तो वे प्रसन्न होते हैं। इसलिए घी का दीपक अर्पित करना हमारे प्रेम और कृतज्ञता को व्यक्त करने का एक तरीका है। क्योंकि अग्नि सूर्य से उत्पन्न होती है, और सूर्य के बिना प्रकाश नहीं होता, इसलिए भगवान कृष्ण को दीपक अर्पित करें। इस प्रकार, इस सरल कार्य से हम परमेश्वर को प्रेम अर्पित करके संसार को प्रेम और शांति प्रदान कर सकते हैं। जैसे वृक्ष की जड़ में पानी डालने से पूरा वृक्ष पोषित होता है, वैसे ही यदि हम चाहते हैं कि पूरे संसार का भला हो, तो कृष्ण की आराधना करें, परमेश्वर की आराधना करें। हमने विभिन्न शास्त्रों में घी का दीपक अर्पित करने के महत्व के बारे में सुना है। मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय अंतरधार्मिक कार्यक्रम है। परम सत्य और भगवान में विश्वास रखने वाले सभी लोगों को इसमें भाग लेने और दीपक अर्पित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। हम जानते हैं कि श्रील प्रभुपाद ने कहा है, मेरे प्रति अपना प्रेम दिखाने का एकमात्र तरीका सहयोग है। इसलिए, हमें गर्व है कि यह कार्यक्रम एक प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय, अंतरधार्मिक और भक्त सहयोग है। और इस प्रकार हम श्रील प्रभुपाद, भगवान चैतन्य और भगवान दामोदर को प्रसन्न कर सकते हैं, हम परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं।

केवल एक ही परमेश्वर है, विभिन्न भाषाओं में उन्हें अलग-अलग नामों से जाना जा सकता है। हर कोई अपनी इच्छानुसार किसी भी रूप को अर्पण कर सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हमारे पास घी का दीपक है तो हम उसे अर्पित कर सकते हैं, अन्यथा मोमबत्ती या कुछ भी अर्पित कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अग्नि होनी चाहिए और उसे प्रार्थना के साथ अर्पित किया जाता है। हम सार्वभौमिक महामंत्र का उच्चारण करते हैं।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण
हरे हरे हरे
 

हरे राम हरे राम राम
राम, हरे हरे!

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण
हरे हरे हरे
 

हरे राम हरे राम राम
राम हरे हरे !

लेकिन आप शास्त्रों में दिए गए किसी भी नाम या प्रार्थना का जाप कर सकते हैं इसलिए हम परमेश्वर के नाम का जाप करते हैं, जिससे शांति और प्रेम की प्राप्ति होती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि साधारण भेंट से भी हमें अपार लाभ प्राप्त हो सकता है। यह कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि बहुत बड़ी बात है क्योंकि यह हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है। भगवान चैतन्य ने सिखाया है कि प्रेम सबसे मूल्यवान वस्तु है। इसलिए इस दीपक को अर्पित करना हमारे प्रेम को अर्पित करना है। यह कोई तुच्छ बात नहीं है। यह प्रेम की अभिव्यक्ति है और अत्यंत शक्तिशाली है। हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि सभी भक्त इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, और आयोजक हमें बता सकते हैं कि कितने लोग ऑनलाइन हैं

हम जानते हैं कि इस महीने कई पवित्र घटनाएँ घटी हैं। बेशक, श्रील प्रभुपाद के अंतर्धान की तिथि 18 नवंबर को पड़ती है। अंग्रेजी पंचांग के अनुसार 14 नवंबर को दीपावली का पर्व भी है। साथ ही, गोवर्धन पूजा और विशेष भीष्म पंचक भी इसी महीने में पड़ते हैं। इस महीने में कई त्यौहार आते हैं । मैं सभी उपस्थित भक्तों का बहुत आभारी हूँ और भगवान दामोदर की जय हो! यशोदा की जय हो! हम श्रीधाम मायापुर से भाग ले रहे हैं, जो भगवान चैतन्य का जन्मस्थान है। हम समझते हैं कि यहाँ दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग हैं, और हम बहुत आभारी हैं कि पिछले कई वर्षों से मलेशिया ने दामोदर माह की इस चुनौती को स्वीकार किया है और इसे हर साल लगातार बढ़ाया है। तो यह एक बहुत अच्छा उदाहरण है कि हम लोगों की परवाह करते हैं, हम उनकी मदद करना चाहते हैं। अगर वे परमेश्वर को यह साधारण सी वस्तु अर्पित करते हैं, तो उन्हें अपार आध्यात्मिक लाभ मिलता है। आमतौर पर लोग परमेश्वर के लिए कुछ नहीं करते। बल्कि अगर कुछ करते भी हैं, तो बस यही माँगते हैं, हे भगवान, हमें हमारी रोजी-रोटी दे दीजिए। आजकल लोग काम करके अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं , इसलिए वे भगवान को भूल गए हैं। लेकिन हम भगवान को याद रखना चाहते हैं, उन्होंने हमें सब कुछ दिया है। उन्होंने हमें सूर्य दिया है, उन्होंने हमें हवा दी है, हवा मुफ्त है। लेकिन इस महामारी में, हवा तो है, पर हम साँस नहीं ले पा रहे! महामारी से हमारी साँस रुक जाती है। इसलिए हम कृष्ण को कुछ अर्पित करना चाहते हैं। इसीलिए हम जप करते हैं और दीपक जलाते हैं। संसार का हर शास्त्र भगवान के पवित्र नाम की महिमा करता है। कुरान, बाइबिल, पुराना नियम, नया नियम, बौद्ध शास्त्र, सब कहते हैं कि मेरा नाम जपो और तुम्हें मुक्ति मिलेगी। इसलिए इस अवसर पर हम दीपक जलाते हैं और भगवान का नाम लेते हैं। अतः हम आशा करते हैं कि इस प्रकार सभी को प्रभु का आशीर्वाद, शुद्ध सहज प्रेम प्राप्त हो।

हरे कृष्ण  हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण  
हरे हरे हरे  
हरे राम  हरे राम राम  
राम  हरे हरे!

Nitāi Gaura! 

- END OF TRANSCRIPTION -
Transcribed by Jayarāseśvarī devī dāsī
Verifyed by JPS Archives
Reviewed by JPS Archives

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