मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिम्
यत्कृपा तमहं वन्दे श्रीगुरुं दीनतारणम्
परमानन्द माधवं श्रीचैतन्य ईश्वरम्
हरिः ॐ तत् सत्
जयपताका स्वामी :
पुरुष हरि-ध्वनि कर सकते हैं और महिलाएँ उलु-ध्वनि कर सकती हैं। महिलाएँ हरि-ध्वनि तथा उलु-ध्वनि दोनों कर सकती हैं। परन्तु पुरुष केवल हरि-ध्वनि कर सकते हैं।
मैं महाविष्णु स्वामी महाराज को धन्यवाद देना चाहूँगा, मुझे नहीं पता कि वे यहाँ हैं या नहीं। मैं पात्री प्रभु का धन्यवाद करना चाहता हूँ कि वे यहाँ आए। रूपेश्वर गौर दास को भी धन्यवाद देना चाहूँगा कि वे यहाँ आए। नौ द्वीपों पर आधारित “नवद्विपधाम” जो नाटक और नृत्य हुआ, उसे देखना बहुत अच्छा लगा। एक मुफ्त ‘मायापुर ऐप’ है, एंड्रॉइड एवं एप्पल के लिए। आप उस ऐप से पूरा नवद्वीप धाम देख सकते हैं। ऐप का नाम है ‘मायापुर’।
मायापुर का निर्माण श्रीमती राधारानी ने किया था और कृष्ण ने कहा कि यह स्थान वृंदावन से भिन्न नहीं होगा। यहाँ जो भी गतिविधि आप करते हैं, वह 1000 गुना बढ़ जाती है। वृंदावन में यदि कोई अपराध करते हैं तो वह भी 1000 गुना बढ़ जाता है। सिद्ध जगन्नाथ दास बाबाजी नवद्वीप धाम आए क्योंकि यहाँ अपराध बढ़ते नहीं हैं। अतएव इसे दया धाम के रूप में जाना जाता है। संस्कृत नाम है औदार्य-धाम, जिसका अर्थ है कृपा या दया। यहाँ, नवद्वीप धाम में लेटना भी भगवान् के अर्चाविग्रहों को प्रणाम करने के समान है।
एक भक्त ने श्रील प्रभुपाद से पूछा, “क्या हम केवल लेट सकते हैं?” श्रील प्रभुपाद ने उत्तर दिया, “यदि लेटने से आपको इतनी कृपा मिलती है, तो क्यों न और सेवा करें?”
हम नेपाल से आए सभी भक्तों का स्वागत करना चाहेंगे! उन्होंने मायापुर के इन कितने द्वीपों का दौरा किया है? यहाँ नौ द्वीप हैं, नवद्वीप। और 500 वर्ष पूर्व यह सभी द्वीप दिखाई देते थे, परंतु अब वे उतने स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर नहीं होते हैं। हम सप्तऋषि-टिला को नहीं देख पाते, क्योंकि टिला का अर्थ है पहाड़ी। नवद्वीप की सभी पहाड़ियाँ तथा अधिकांश पवित्र स्थान हमें मिले हैं।
हमने नौ द्वीपों के चारों ओर कुछ शिविर स्थल बनाए हैं। कुछ भक्त जीप का उपयोग करके परिक्रमा करते हैं। गौर) पूर्णिमा के समय हमारे पास 7 या 8 परिक्रमा दल होते हैं। संभवत: भविष्य में हमारे पास नेपाली दल भी होंगा ! हमारे पास एक हिंदी दल, चार बंगाली दल, अंतर्राष्ट्रीय दल, दक्षिण भारतीय दल, हैं, हमारे पास पहले एक रूसी दल, भी होता था , मुझे नहीं पता कि अब होगा या नहीं। हमारे पास अभी नेपाली, नहीं है। कौन प्रति वर्ष नेपाली दल में सम्मिलित होना चाहेगा?
भगवान् चैतन्य ने यहाँ 24 वर्ष बिताए। फिर वे जगन्नाथ पुरी गए। उन्होंने छह वर्ष भारत भर के अनेक स्थानों की यात्रा की और 18 वर्ष जगन्नाथ पुरी में बिताए। उन्होंने कहा कि उनका संदेश, उनका नाम विश्व के प्रत्येक नगर एवं ग्राम में गाया जाएगा। हम चाहते हैं कि नेपाली भक्त नेपाल के प्रत्येक नगर एवं ग्राम में पवित्र नाम का प्रचार करें।
हम वृंदावन की एक सफारी पर गए थे और तब भगवान् श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के 24 चरण पद्म चिह्न स्थापित किए। कितने लोग वृंदावन सफारी में गए थे? दुर्भाग्य से, मैं बीमार हो गया तथापि में इंटरनेट के माध्यम से वहां उपस्थित था। मैं नई दिल्ली के अस्पताल में था। भक्त सफारी पर गए और भगवान चैतन्य के 24 चरण पद्म चिह्न स्थापित किए। अगले वर्ष हम दक्षिण भारत में जाकर प्रत्येक स्थान पर भगवान् चैतन्य के चरण चिह्न स्थापित करने की आशा करते हैं जहाँ-जहाँ भगवान् गए थे।
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद ने भारत में लगभग 8 पादपीठ स्थापित किए। पूर्व एवं पश्चिम भारत में। वह चाहते थे कि भारत में जहाँ-जहाँ भगवान् चैतन्य गए, वहाँ और भी पादपीठ स्थापित किए जाएँ। हम उनकी इस इच्छा को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या भगवान् चैतन्य नेपाल में कहीं गए थे? (नेपाल में एक स्थान है गौर , जो भारत की सीमा से सटा हुआ है। भगवान् नित्यानंद मिथिला, जनकपुर गए थे)। हम नामहट्टा भवन में चरण पद्म चिह्न देख सकते हैं।
भगवान् चैतन्य के अवतरण का बाहरी कारण था कलियुग के धर्म, हरि नाम संकीर्तन, का प्रचार करना। और मुझे लगता है कि पात्री प्रभु तथा महाविष्णु स्वामी महाराज सभी को जप करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। मैं इस्कॉन मंदिर के पास एक गेस्ट हाउस में ठहरा था। पात्री प्रभु ने कीर्तन किया। तो भगवान् चैतन्य संपूर्ण विश्व को पवित्र नाम का प्रचार करना चाहते हैं। हरिबोल!
सामान्यत: हिंदू समाज में धार्मिक समाज के लोग उद्धार पाते हैं। भगवान् चैतन्य ने कहा,
किबा विप्र, किबा न्यासी, शूद्र केने नय
येई कृष्ण-तत्त्व-वेता, सेई ‘गुरु’ हय
(श्री चैतन्य चरितामृत, मध्य लीला 8.128)
श्रील प्रभुपाद ने श्रीमद्भागवतम् के नौवें स्कंद में कहा है कि जब कृष्ण चेतना की बात आती है, तो स्त्री, पुरुष, शूद्र, कोई भी हो, सभी समान होते हैं।
हम पश्चिमी देशों में पैदा हुए थे, अतएव वहाँ की संस्कृति स्वाभाविक रूप से यवन और म्लेच्छ है। परंतु श्रील प्रभुपाद ने भगवान् चैतन्य की वाणी का प्रचार किया और सभी यवनों को कृष्ण भावनामृत वाले वैष्णवों में परिवर्तित किया। नेपाल कभी पृथ्वी का एकमात्र हिंदू राज्य हुआ करता था। हम चाहते हैं कि आप भगवान् चैतन्य की कृपा लें और इसे फैलाएँ।
मुझे लगता है कि आपको अब भोजन के लिए जाना होगा। आप ‘मायापुर ऐप’ डाउनलोड कर सकते हैं और कृष्ण तथा नवद्वीप धाम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मुझे बताया गया था कि मुझे रात्रि 8.15 बजे तक रुकना होगा। जैसे ही मैंने देखा कि वे नवद्वीप के नौ द्वीपों की लीला कर रहे थे, मुझे पता था कि नाटक लंबा होगा। तो मैं आप सभी का स्वागत करना चाहूँगा! सुस्वागतम्!
हरे कृष्ण!
Lecture Suggetions
-
20211003 प्रश्न और उत्तर, परम पूज्य जयपताका स्वामी के साथ
-
20210612 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.10
-
20210830 श्रीमद्-भागवतम्
-
20210702 श्री गौर मंडल भूमि परियोजना संभाषण
-
20210801 भाद्र पूर्णिमा विशेष अभियान संबोधन
-
20211017 इस्कॉन चेन्नई के पासाना उत्सव को संबोधित करते हुए
-
20210731 श्रीमद्-भागवतम् १.१०.४
-
20211121 रशियन दूसरी पीढ़ी के शिष्यों को संबोधन
-
20210801 संबोधन: इस्कॉन जापान भक्ति-शास्त्री प्रमाण पत्र पुरस्कार समारोह
-
20210701 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20211030 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.18
-
20210717 जीबीसी एसपीटी (रणनीतिक योजना टीम) के साथ साक्षात्कार
-
20211016 दामोदर महोत्सव वैश्विक उद्घाटन
-
20211014 श्रील प्रभुपाद आ रहे हैं - सम्प्रदाय सम्मेलन को संबोधन
-
20210525 श्रीमद् भागवतम् 7.6.19
-
20210605 श्रीमद्-भागवतम् 1.8.52
-
20211122 श्रील प्रभुपाद पुस्तक वितरण मेराथोन उद्घाटन भाषण
-
20211017 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.2
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मलेशिया और पर्थ को उद्बोधन
-
20210711 गोलोक - भद्रा पूर्णिमा-श्रीमद-भगवतम अभियान संबोधन
-
20211106 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.23
-
20210828 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.33-35
-
20210619 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.17
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव - इस्कॉन पूर्व और पश्चिम बंगाल को उद्बोधन
-
20210807 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.11-12
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभवदिवस पर इस्कॉन गंगटोक और अंबाला भक्तों को संबोधन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मायापुर को उद्बोधन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन तिरुपति को उद्बोधन
-
20211016 बांग्लादेश भक्तों के लिए संदेश
-
20210628 प्रश्नोत्तर सत्र
