Text Size

20210930 प्रश्न और उत्तर सत्र

30 Sep 2021|Duration: 00:12:48|हिन्दी|प्रश्नोत्तर सत्र|Transcription|Śrī Māyāpur, India

प्रश्न: बंगाली: श्री चैतन्य महाप्रभु जब उन्हें लाखों, लाखों लोगों के साथ वृंदावन जाना था, तब वे लौट आए। और उन्होंने व्यक्त किया कि इतने सारे भक्तों के साथ वृंदावन जाना उचित नहीं था। फिर गुरु महाराज, क्या हमें अत्यधिक भक्तों को वृंदावन या नवद्वीप में नहीं लाना चाहिए? श्री चैतन्य महाप्रभु इस लीला के माध्यम से हमें क्या बताने का प्रयास कर रहे हैं?

जयपताका स्वामी : इतने लाख और लाखों लोग भगवान् चैतन्य के साथ जा रहे थे। चैतन्य महाप्रभु, जब वे वृंदावन जाते तो उन्हें तीव्र भावों की अनुभूति होती । यदि वे इतने सारे भक्तों के साथ जाते, तो वे भगवान् श्रीकृष्ण की वृंदावन लीलाओं का अनुभव और ध्यान नहीं कर पाते। परन्तु हम यह नवद्वीप परिक्रमा और वृंदावन परिक्रमा हजार या दो हजार लोगों के साथ करते हैं। किंतु जहां तक हमारा संबंध है, श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर और श्रील प्रभुपाद ने भक्तों के साथ ऐसा ही किया। यदि हम उनका अनुसरण ही करते हैं जैसे उन्होंने किया, तो कोई समस्या नहीं है। जब हम भक्तों की संगति में परिक्रमा करते हैं तो हमारे लिए भगवान् की लीलाओं पर ध्यान करना सरल हो जाता है। श्री चैतन्य महाप्रभु, जहां तक उनकी स्थिति का संबंध था, यह एक अलग स्थिति थी।

श्रीरूप माधवी देवी दासी, मायापुर : बाल कृष्ण और बालिका योगमाया दोनों के आदान-प्रदान के बाद, योगमाया कारागार में आई, और राजा कंस के हाथों से छुट कर आकाश मे उड़ गई। सुभद्रा माई का लालन पालन कैसे हुआ?

जयपताका स्वामी : सुभद्रा देवी भी वासुदेव की पुत्री हैं। और कृष्ण और बलराम की बहन के रूप में वे वृंदावन में पली-बढ़ीं। और यह वही योगमाया है जो कसं को दिखाई दी थी, यह स्पष्ट नहीं है|

अरविंदाक्ष गोविंद दास, भोपाल : शिष्यों को गुरु से क्षमा कैसे मांगनी चाहिए?

जयपताका स्वामी : निष्ठापूर्वक क्षमा मांगनी चाहिए ।

- END OF TRANSCRIPTION -
Transcribed by हिंदी अनुवाद: रति रूपिणी जाह्नवा देवी दासी
Verifyed by सत्यापित :अजित मधुसूदन दास
Reviewed by समीक्षित : भवानन्दिनी देवी दासी

Lecture Suggetions