परम पूज्य श्रील जयपताका स्वामी महाराज द्वारा जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव पर 12 जुलाई 2021 का संबोधन, श्रीधाम मायापुर, भारत मैं।
मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे श्री-गुरुम् दीन- तारणम्
परमानन्द माधवम् श्री चैतन्य ईश्वरम्॥
हरि ॐ तत् सत्॥
जगन्नाथ स्वामी नयन पथ गामी
नयन पथ गामी भवतु में ॥
नीलाचल- चंद्र अमु प्रभु जगन्नाथ
जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ॥
सुंदराचल-चंद्र अमु प्रभु जगन्नाथ
जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ॥
आज विशेष रथयात्रा पर्व है। दुर्भाग्यवश, कोविड- 19 महामारी के कारण राज्यव्यापी आवागमन बंद हैं। अन्यथा, हम लाखों लोगों के साथ रथ-यात्रा कर रहे होते। किन्तु हमें रथ-यात्रा अत्यंत सीमित प्रकार से करनी पड़ रही है । साथ ही हम इस विशेष उत्सव को मनाना भी चाहते हैं। भगवान् चैतन्य, भगवान् जगन्नाथ को गुंडिचा मंदिर ले जाते थे, जिसे वृंदावन माना जाता है । वह भगवान् कृष्ण को , भगवान् जगन्नाथ को वापस वृंदावन ले जाने के भाव में थे। तो, यह एक महान उत्सव का समय है! भक्त भगवान् जगन्नाथ को विभिन्न भोग अर्पित कर सकते हैं।
सामान्यतः भगवान् जगन्नाथ का रथयात्रा महोत्सव कोलकाता मैदान में होता था और हजारों लोग इसमें सम्मिलित होते थे। हम प्रसाद वितरित करते थे और विभिन्न
व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे । हमारे पास भक्ति-वृक्ष समूहों के विशेष संपर्क , पुस्तक स्टॉल , प्रश्नोत्तर बूथ और विभिन्न सूचना कक्ष और अत्यधिक प्रचुर मात्रा में जगन्नाथ महाप्रसाद होता था ! तो हमें यह सब मंदिर में करना है। और भगवान् जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र की यथासंभव पूजा करनी है । तो हम आशा करते हैं कि सभी भक्त, जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा, सुदर्शन चक्र की रथ-यात्रा का महोत्सव मनाने की प्रेरणा लेंगे और पवित्र नामों, हरे कृष्ण का जप करके हम सभी धन्य होंगे|
भगवान् जगन्नाथ की जय!
बलदेव की जय!
सुभद्रा की जय!
सुदर्शन चक्र की जय!
श्रील प्रभुपाद ने कहा कि हमें भगवान् जगन्नाथ को अपने राधा कृष्ण मंदिर ले जाना चाहिए। तो सामान्यतः कोलकाता मैदान में हमारे पास श्री श्री राधा गोविंद होते थे । परन्तु यहाँ हमारे कोलकाता मंदिर में श्री श्री राधा गोविंद, तथा गौर नटराज हैं। तो किसी प्रकार हम भगवान् जगन्नाथ को इस राधा कृष्ण मंदिर में ले जाएंगे ।
आपके सहयोग के लिए धन्यवाद!
आपके उत्साह के लिए धन्यवाद!
आपकी भक्ति के लिए धन्यवाद!
" गृहे ठाको वने ठाको ,सदा हरि बोले डाको"!
हरे कृष्ण!
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