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20210603 प्रश्न उत्तर सत्र

3 Jun 2021|हिन्दी|प्रश्नोत्तर सत्र|Transcription|Śrī Māyāpur, India

श्री  श्रीमद् जयपताका स्वामी महाराज द्वारा 03 जुन, 2021 को श्रीधाम मायापुर, भारत में  लिए गए प्रश्न उत्तर सत्र

चूंकि आज 7 से 8.30 बजे तक हमारी एमवीटी बैठक हुई थी, अतः आज हमें कक्षा लेने में विलंब हो गया है परन्तु फिर भी यदि आपके कुछ प्रश्न है - तो मैं कदाचित दो अथवा तीन प्रश्नों के उत्तर दूँगा ।

प्रश्न : भाग्यश्री देवी दासी:  बंगाली में -  जब भगवान् जगन्नाथ एवं भगवान् बलराम ने अपनी दंड लीला अभिनीत की, तब पुंडरीक विद्यानिधि को उनकी भूल ज्ञात हुई । किन्तु मैं अनेक अपराध करती हूँ । संभवतः मैं अपने अपराधों को समझ भी नहीं पाती तो ऐसी परिस्थितियों में मैं आपसे तथा भगवान् श्रीकृष्ण से क्षमा कैसे माँगू जिससे आप मुझे पूर्ण रूप से क्षमा कर सकें?

जयपताका स्वामी : हमें भगवान् श्रीकृष्ण से प्रार्थना करनी चाहिए कि मैंने जाने या अनजाने में अनेक अपराध किए हैं, कृपया मुझे क्षमा करें ।

प्रश्न : केया रानी, श्यामदेश - कभी-कभी हम अ-भक्तों को भक्तों की अथवा हमारे आंदोलन की आलोचना करते हुए सुनते हैं। अनेक बार हम ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जब हम उनसे कुछ कह नहीं पाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में हमें क्या करना चाहिए क्योंकि उनकी बातों का दूसरों पर भी बुरा अथवा भारी प्रभाव पड़ सकता है? कृपया ज्ञानवर्धन करें।

जयपताका स्वामी : तो तीन विकल्प हैं,  सती देवी की भांति , आप तुरंत स्वयं को अग्नि में समर्पित् कर सकते हैं एवं यदि यह संभव नहीं है, तो आप उनका शास्त्र के आधार पर  विरोध कर सकते हैं एवं उन्हे पराजित कर सकते हैं। यदि यह संभव न हो तो उस स्थान का त्याग कर दें।

प्रश्न: श्याम मुरली दास: बंगाली में-  हमें ज्ञात हैं कि पुंडरीक विद्यानिधि वृषभानु महाराज के अवतार है  तो वे भगवान् जगन्नाथ के पिता के समान हैं । तो उन्हें थप्पड़ लगाना अथवा दंड देना  - क्या यह उचित है अथवा अनुचित?

जयपताका स्वामी : यद्यपि किसी लीला में हमें भगवान् श्रीकृष्ण के माता-पिता होने की स्थिति प्राप्त होती है, तथापि भक्त  इसे एक सेवा के रूप में करते हैं । तो पुंडरीक विद्यानिधि, वे एक भक्त के रूप में अभिनय कर रहे हैं, वे माता-पिता के रूप में अभिनय नहीं कर रहे हैं । यद्यपि वे पूर्व लीला में भगवान् के माता-पिता रहे होंगे, वे इस लीला में  भगवान् के माता-पिता के रूप में नहीं हैं। इस कारण से भगवान् उन्हें एक विशेष कृपा के रूप में ताड़ना दे रहे है।

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Transcribed by प्रतिलेखन का हिन्दी अनुवाद - विजया रंगदेवी दासी द्वारा
Verifyed by सत्यापित : राधिका प्रेमभक्ति देवीदासी देवी द्वारा
Reviewed by समीक्षित : भवानन्दिनी देवी दासी द्वारा

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