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20210831 व्यास-पूजा कृष्ण कृपा मूर्ति ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद को भेंट करते हुए

31 Aug 2021|हिन्दी|Vyāsa-pūjā Glorifications|Transcription|Śrī Māyāpur, India

नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले
श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।
नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे
निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥

 जयपताका स्वामी: श्रील प्रभुपाद, मैं आपके चरण कमलों में प्रणाम करता हूँ । आपने मुझे यात्रा करने के लिए कहा, आपने मुझे मायापुर में रहने के लिए भी कहा। आपने मेरे सहायकों के माध्यम से प्रचार करने के लिए कहा। तो, किसी न किसी तरह आपने कृष्णभावनामृत को १०८ नगरों में पहुँचाया हैं! और आप विश्व के हर महाद्वीप में कृष्ण भावनामृत लाए हैं। तो आपके शिष्यों और उनके शिष्यों ने व्यावहारिक रूप से हर देश में कृष्ण भावनामृत पहुँचाया है, अब कई नगरों में। हमने भक्ति पुरुषोत्तम स्वामी से सुना कि यह कैसे जंगलों तक भी पहुंच रहा है! हम अपने नामहट्टों और गीता पाठ्यक्रम से जानते हैं कि हम कई गांवों तक पहुँच रहे हैं। यदि आप भगवान् चैतन्य की भविष्यवाणी को संतुष्ट करना चाहते हैं कि विश्व के हर नगर और गांव में भगवान् चैतन्य का नाम गाया जाएगा। इसलिए, हमें अभी और अधिक कार्य करने है। और मैंने सोचा कि आपके द्वारा शुरू की गई गौर वाणी प्रचार को पूरा करने के लिए भक्तों की पीढ़ियों को प्रयास करना चाहिए इस तरह भगवान् चैतन्य की कृपा , पंच-तत्त्व का विस्तारण संपूर्ण विश्व में किया जा सकता है। हम चैतन्य-चरितामृत में पढ़ रहे थे जब सभी लोग हरे कृष्ण का जप करते हैं तो पंचतत्व कितने प्रसन्न होते हैं ! जब सारा संसार कृष्ण प्रेम से भर जाता है! और

तब भगवद् प्रेम की बाढ़ के पानी के कारण भौतिक भोग का बीज अंकुरित नहीं होता। तो भगवान् चैतन्य, पंच-तत्व, वे लोगों को हरे कृष्ण का जप करते हुए देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं । आप यह संदेश संपूर्ण विश्व में लेकर आए हैं। 

और आपने कहा था कि हमारे पास हजारों, दसियों हजार, सैकड़ों-हजारों गुरु होने चाहिए। वास्तव में अंततः, लाखों और दसियों लाख। तो आपके पास यह देखने की दृष्टि थी कि पूरा विश्व कृष्ण भावनाभावित हो जाएगा । हमने हरिसौरी प्रभु से सुना, आप विश्व को कैसे बचाना चाहते थे! कि विश्व पीछे मुड़कर देखे और कहे कि श्रील ए

सी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के कृष्ण भावनामृत आन्दोलन ने हमें बचा लिया! 

तो, हमें आपके निर्देशों का पालन करना चाहिए ।  आपने कहा था कि वास्तव में, आप 18 दिनों में दुनिया को संभाल सकते हैं जब भक्त आपके निर्देशों का पालन करेंगे। अभी, हमें आपके सभी निर्देशों का पालन करना है और बहुत जल्द, आपके शिष्य इस भौतिक संसार को छोड़कर ऊर्ध्व गति करेंगे। हमने पहले ही परम पूज्य भक्ति चारू स्वामी और कई अन्य लोगों को खो दिया है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों को इस आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा। आपने अपनी पुस्तकें प्रदान की  हैं जिनका गहन अध्ययन किया जाना चाहिए और इसलिए आपने भक्ति शास्त्री, भक्ति वैभव, भक्ति वेदांत और भक्ति सार्वभौम शुरू किया और इसलिए भक्तों को स्वयं को इन शास्त्रों का अध्ययन करने के लिए समर्पित करना चाहिए और फिर इस ज्ञान को स्वीकार करना और  सभी को वितरित करना चाहिए । 

यदि हम कृष्ण को प्रसन्न करते हैं, तो हम कृष्ण के अंश हैं और स्वाभाविक रूप से हम सुखी हो जाते हैं। परंतु दुर्भाग्य से हम सोच रहे हैं कि हम शरीर हैं और यह कि हमारी इंद्रियां हमें संतुष्ट करेंगी। और इस तरह हम आपके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। तो कृपया, हमें आशीर्वाद दें ताकि हम आपका अनुसरण कर सकें।

यहाँ मायापुर में, मुझे याद है कि आप बहुत कृपालु थे, आप डेढ़ महीने रुकते, अपनी पुस्तकों का अनुवाद करते, और सूर्यास्त के समय, जननिवास प्रभु अपने धूना के साथ जाते और आपके कमरे को धूमिल करते और पुरुष सूक्त का जाप करते और फिर आप व्यक्तिगत रूप से हमें सिखाते कि अतिथि के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। और आप व्यक्तिगत रूप से कुछ वीआईपी के साथ बैठते और हमें प्रसाद बांटते। कितने प्रकार से - आप घूमते फिरते, आप देखते, आप चाहते थे कि मायापुर में बहुत स्वच्छ वातावरण हो। और आपने मायापुर को विश्व मुख्यालय बनाया। इससे पहले , मुझे लगता है कि मायापुर की स्थापना से पहले 1970 के दशक में लॉस एंजिल्स विश्व मुख्यालय था। 

तो आप श्रील भक्ति देवी दासी को सिखा रहे थे कि अर्चा विग्रह की पूजा कैसे करें, एक दिन में छह आरती कैसे करें, मंगला आरती कैसे करें। तो ये सब चीज़ें इस्कॉन में नहीं थीं। किंतु आपने इन्हें  स्थापित  किया और इसलिए अब हम बहुत सी चीजें कर रहे हैं क्योंकि आपने स्थापित किया है। तो इस तरह, अब हमारे पास विश्व भर में बहुत अच्छे मानक हैं और इस तरह कृष्ण भावनामृत आंदोलन का विस्तार हो सकता है और विस्तार हो रहा है। परंतु हम हर कस्बे और गांव के सभी लोगों तक पहुंचना चाहते हैं। हमें यह प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद। मुझे लगता है कि आपने सबसे महत्वपूर्ण काम किया और आपने कहा कि वर्णाश्रम छूट रहा था। तो आपने जो भक्ति की स्थापना की, हम उसे वर्णाश्रम के लिए बर्बाद नहीं  करना चाहते। लेकिन हम दैव वर्णाश्रम की स्थापना कैसे कर सकते हैं? यह एक रूचिकर प्रश्न है। क्योंकि बहुत से लोगों के वर्णाश्रम के बारे में अलग विचार हैं। तो यह कुछ ऐसा है जिस पर हम अभी भी काम कर रहे हैं। और निश्चित रूप से गायों की रक्षा करना एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसलिए मायापुर में आपने हम पर जो कृपा की, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ,  और मुझे आशा है कि मायापुर समुदाय बढ़ेगा और बढ़ेगा और हम आपके सपनों को पूरा करने में सक्षम होंगे! हरे कृष्ण!

- END OF TRANSCRIPTION -
Transcribed by हिंदी अनुवाद -अजित मधुसूदन दास द्वारा
Verifyed by सत्यापित भवानंदिनी देवीदासी द्वारा
Reviewed by समीक्षित-भवानंदिनी देवीदासी द्वारा

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