निम्नलिखित वीडियो भारत के श्री धाम मायापुर में 16 सितंबर, 2020 को परम पूज्य जयपताका स्वामी महाराज के साथ हुए ज़ूम सत्र का है। यह सत्र उत्कल भक्तों के साथ आयोजित किया गया था।
नाम ॐ विष्णुपादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भू-तले
श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नमिने
नमस् ते सरस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे
निर्विशेष-शून्यवादी-पाश्चत्य-देश-तारिणी
मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्
यत्-कृपा तम अहम वन्दे श्रीगुरुं दीन-तारणं
परमानंदम माधवं श्री चैतन्य ईश्वरम्
Hariḥ oṁ tat sat!
जयपताका स्वामी : मैं जो कुछ भी कहूँ, क्या आप उसका ओडिया में अनुवाद करेंगे? हर 32 महीनों में जब चंद्र माह और सूर्य माह एक होते हैं, तो एक अतिरिक्त माह आता है। उस माह का कोई नाम नहीं था। क्योंकि उस माह में कोई पुण्य कर्म नहीं किया जाता। इसीलिए स्मार्त इसे मल, अपवित्र कहते हैं। उस माह का मानवीकरण हुआ और कृष्ण ने कहा, “मैं तुम्हें आश्रय दूँगा। और आज से तुम्हारा नाम पुरुषोत्तम माह होगा। और तुम सभी माहों के राजा होगे।” सभी माहों में चाहे जितने भी पुण्य कर्म किए जाएँ, वे पुरुषोत्तम माह के लाभ के 1/16वें भाग के भी बराबर नहीं हैं। यह पुरुषोत्तम माह भक्ति सेवा के लिए है। यदि हम इस माह का पालन करें, तो जीवन के अंत में हम वैकुंठ या गोलोक-धाम लौट सकते हैं। इस माह के विशेष लाभ हैं। इस माह में, जो दीक्षित हैं और 16 माला जप करते हैं तथा कृष्ण-प्रसाद ग्रहण करते हैं, यदि वे इस माह का पालन करते हैं, तो उनका जीवन अत्यंत शांतिपूर्ण होगा और अंत में वे भगवान के धाम लौटेंगे। इस माह में, प्रतिदिन घी का दीपक जलाकर राधा और कृष्ण की आराधना करनी चाहिए। यदि किसी कारणवश आप घी का दीपक नहीं जला सकते, तो तेल का दीपक जला सकते हैं। इस माह में एक मंत्र का 33 बार जाप करना है। जो दीक्षित नहीं हैं और 16 माला जप नहीं करते, उनके लिए इस माह में शाकाहारी रहना और कृष्ण-प्रसाद ग्रहण करने का प्रयास करना बेहतर है। जो जप करते हैं, उन्हें मालाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। जो जप नहीं करते, उन्हें धीरे-धीरे एक या दो या चार माला जप करने का प्रयास करना चाहिए। इस माह में सभी को शाकाहारी रहने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज नहीं खाना चाहिए। इस माह में सरसों के तेल का सेवन वर्जित है। इस माह में पलंग पर नहीं सोना चाहिए और कृष्ण-प्रसाद के अलावा कुछ भी नहीं खाना चाहिए। झूठ बोलने से बचना चाहिए। भक्तों की निंदा नहीं करनी चाहिए। इस प्रकार, जो दीक्षित हैं, वे राधा और कृष्ण की 16 उपचाराओं से पूजा कर सकते हैं । जो दीक्षित नहीं हैं, वे केवल आरती कर सकते हैं। माह के अंत में किसी ब्राह्मण को प्रसाद अर्पित करना चाहिए। 33 मालपुआ बनाकर गृहस्थ ब्राह्मण को दान करना चाहिए । इस माह के देवता राधा-कृष्ण हैं। दामोदर माह की तरह, इस माह के विशेष देवता बाल कृष्ण और माता यशोदा हैं। क्या किसी के पास कोई प्रश्न है?
यदि संभव हो तो आपको कुछ दान-पुण्य करना चाहिए और प्रसाद बांटना चाहिए , जो बहुत अच्छा होगा।
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