निम्नलिखित परम पावन जयपताका स्वामी महाराज द्वारा 19 मई, 2020 को श्री धाम मायापुर, भारत में दिया गया एक ज़ूम सत्र है।
जयपताका स्वामी : हमारा लॉकडाउन अभी भी जारी है, इसे 56 दिन हो चुके हैं। लॉकडाउन क्यों है? क्योंकि डॉक्टरों को अभी तक कोई सही दवा नहीं मिली है। कई लोग अपने आप ठीक हो रहे हैं। लेकिन हम इस बीमारी के इलाज के लिए कुछ प्राकृतिक तरीकों को आजमा रहे हैं। सरकार सभी से विशेष रूप से हाथ धोने का आग्रह कर रही है। यह वायरस किसी भी जगह पर तीन दिन तक जीवित रह सकता है। इसीलिए सरकार हमें बार-बार हाथ धोने के लिए कह रही है ताकि वायरस नष्ट हो सके। अगर हमारे हाथ में वायरस है और हम उस हाथ को अपने चेहरे पर छूते हैं तो वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है। इस बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं हैं, और कई लोग बिना लक्षणों के भी इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। लेकिन वे इसे दूसरों तक फैला सकते हैं। ऐसे में अगर हम अस्पताल जाते हैं तो और भी परेशानी होती है। लेकिन अगर किसी को स्पष्ट लक्षण हैं तो उन्हें अस्पताल जाना ही होगा। खैर, हम वैकल्पिक उपचार विधियों को खोजने का प्रयास कर रहे हैं।
इस लॉकडाउन का एक फायदा है। टेलीफोन, इंटरनेट, ज़ूम आदि के माध्यम से हम भगवान के पवित्र नाम का प्रचार कर सकते हैं। फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर आमतौर पर गपशप होती है, लेकिन इनका उपयोग हरिनाम का प्रचार करने के लिए भी किया जा सकता है। हमने देखा कि एक जगह भगवद्गीता से नए लोगों को परिचित कराने के लिए ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्हें लगा था कि शायद 50 या 60 लोग जुड़ेंगे, लेकिन 500 लोगों ने पंजीकरण कराया! सिर्फ भगवद्गीता सुनने के लिए। डॉक्टर, वैज्ञानिक, सरकार, सबकी अपनी सीमाएं हैं, वे क्या कर सकते हैं? अब भगवान के नाम का जप कैसे करें और आध्यात्मिक उन्नति कैसे करें? यह बीमारी जानवरों से आई है। हमने प्रकृति के नियमों को कई तरह से तोड़ा है और यह उसी का परिणाम है। अब कुछ लोग चमगादड़, सांप खा रहे हैं और उनसे यह बीमारी फैल रही है। क्योंकि वायरस जानवरों से आया है, हमारे शरीर में इससे लड़ने के लिए एंटीबॉडी नहीं हैं। वे कह रहे हैं कि वे टीका बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई गारंटी नहीं है। खैर, अगर सभी लोग शाकाहारी भोजन करें और भगवान का नाम जपें, तो प्रकृति के जिन नियमों का हमने उल्लंघन किया है, वे सुधर सकते हैं। इसलिए इस अवसर का लाभ उठाकर आप भगवान के नामों का प्रचार करें। जो गृहस्थ हैं, वे दो-तीन लोगों को भोजन करा सकते हैं, अगर कोई भूखा हो और उसे भोजन न मिल पा रहा हो। तो यह गृहस्थों के लिए एक सुविधा है। मायापुर में आमतौर पर बहुत से भक्त आते हैं और जब वे आते हैं, तो मंदिर में दान आदि देते हैं। अब कोई मंदिर नहीं आ रहा है। शराब की दुकानें खुली हैं, लेकिन मंदिर बंद हैं! आप शराब खरीद सकते हैं, लेकिन भगवान के दर्शन करने नहीं जा सकते! खैर, हमें कुछ आर्थिक समस्याएं हैं। अगर आप में से कोई दान करना चाहता है, तो कर सकता है। खैर, यह भगवान के पवित्र नामों का प्रचार करने का एक बहुत ही विशेष अवसर है।
मैंने पढ़ा कि आज श्रील वृंदावन दास ठाकुर का प्रकटोत्सव है। भगवान चैतन्य ने कहा कि मैंने महामंत्र दिया है, यदि तुम इसका जाप करो और कीर्तन करो, तो सब कुछ तुम्हारे लिए परिपूर्ण हो जाएगा। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे! इसका उल्लेख श्रील वृंदावन दास ठाकुर द्वारा रचित चैतन्य-भागवत में है। उन्होंने कहा कि पाँच या दस लोग एकत्रित होकर ताली बजाएँ और पवित्र नाम का कीर्तन करें। इस प्रकार भगवान चैतन्य ने नामहट्ट की शुरुआत की। पाँच या दस लोग अलग-अलग घरों में एकत्रित होते थे। वैसे भी, भगवान के पवित्र नामों का जप करने से मिलने वाले आनंद की कोई सीमा नहीं है! अधिवास कीर्तन में हम एक गीत गाते हैं – आनंदरे सीमा नाई, आनंदरे सीमा नाई, निरानंद दूरे जय, निरानंद दूरे जय ! हरे कृष्ण महामंत्र कलियुग के सभी दोषों को दूर कर सकता है। और इसी से कृष्ण प्रेम का उदय होता है ।
पुराणों में कहा गया है कि भगवान के नाम का जप करने से अनेक रोग दूर होते हैं। भगवान नरसिंहदेव का 21 बार जप करने से समस्त रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। “ जय नरसिंह श्री नरसिंह जय जय जय नरसिंह ” का 21 बार जप करने से समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। परन्तु श्रेष्ठ तो हरे कृष्ण महामंत्र कीर्तन है । हम भगवान को प्रसन्न करने के लिए कीर्तन करते हैं। यदि कोई पापी है तो महामंत्र का जप करने से उसे मुक्ति मिल सकती है।
खैर, आप जानते हैं और लोगों को उपदेश दे रहे हैं।
Lecture Suggetions
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव - इस्कॉन पूर्व और पश्चिम बंगाल को उद्बोधन
-
20210731 श्रीमद्-भागवतम् १.१०.४
-
20211017 इस्कॉन चेन्नई के पासाना उत्सव को संबोधित करते हुए
-
20211030 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.18
-
20210605 श्रीमद्-भागवतम् 1.8.52
-
20211106 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.23
-
20211016 बांग्लादेश भक्तों के लिए संदेश
-
20210711 गोलोक - भद्रा पूर्णिमा-श्रीमद-भगवतम अभियान संबोधन
-
20210628 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20210807 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.11-12
-
20210801 संबोधन: इस्कॉन जापान भक्ति-शास्त्री प्रमाण पत्र पुरस्कार समारोह
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभवदिवस पर इस्कॉन गंगटोक और अंबाला भक्तों को संबोधन
-
20210701 प्रश्नोत्तर सत्र
-
20210702 श्री गौर मंडल भूमि परियोजना संभाषण
-
20211014 श्रील प्रभुपाद आ रहे हैं - सम्प्रदाय सम्मेलन को संबोधन
-
20210619 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.17
-
20210828 श्रीमद्-भागवतम् 1.10.33-35
-
20210525 श्रीमद् भागवतम् 7.6.19
-
20210717 जीबीसी एसपीटी (रणनीतिक योजना टीम) के साथ साक्षात्कार
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मलेशिया और पर्थ को उद्बोधन
-
20210612 श्रीमद्-भागवतम् 1.9.10
-
20211017 श्रीमद्-भागवतम् 1.12.2
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन मायापुर को उद्बोधन
-
20210801 भाद्र पूर्णिमा विशेष अभियान संबोधन
-
20211003 प्रश्न और उत्तर, परम पूज्य जयपताका स्वामी के साथ
-
20211016 दामोदर महोत्सव वैश्विक उद्घाटन
-
20211121 रशियन दूसरी पीढ़ी के शिष्यों को संबोधन
-
20211108 श्रील प्रभुपाद तिरोभाव इस्कॉन तिरुपति को उद्बोधन
-
20210830 श्रीमद्-भागवतम्
-
20211122 श्रील प्रभुपाद पुस्तक वितरण मेराथोन उद्घाटन भाषण
